Siddharthnagar: 20 लाख के पंचायत घोटाले में जांच रिपोर्टों में टकराव, पीडी पर रिश्वत लेने का आरोप

Sandesh Wahak Digital Desk: सिद्धार्थनगर जनपद के खेसरहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत विशुनपुर मुस्तहकम में करीब 20 लाख 41 हजार 552 रुपये के कथित घोटाले को लेकर दो वरिष्ठ अधिकारियों की जांच रिपोर्टों में विरोधाभास सामने आया है। एक ओर जहां जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) की जांच में ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी और पंचायत सचिव पंकज त्रिपाठी दोषी पाए गए, वहीं दूसरी ओर परियोजना निदेशक (पीडी) नागेंद्र मोहन त्रिपाठी ने इन्हें क्लीन चिट दे दी है।

इस विसंगति को लेकर ग्रामीण शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार भारती, राजकिशोर और गणेश प्रसाद ने जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा और पीडी पर रिश्वत लेकर गलत रिपोर्ट देने का गंभीर आरोप लगाया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीडी त्रिपाठी ने ग्राम प्रधान और सचिव से सांठगांठ कर जांच को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई, शिकायतकर्ताओं को सुनवाई का मौका नहीं मिला और न ही पंचायत में जाकर कोई भौतिक सत्यापन किया गया। आरोप है कि कार्यालय में बैठकर मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार की गई और जिलाधिकारी के समक्ष पेश कर दी गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पूरे मामले की जानकारी देंगे।

क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत विशुनपुर मुस्तहकम में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इस पर डीडीओ गोपाल प्रसाद कुशवाहा द्वारा की गई जांच में ग्राम प्रधान और सचिव की संलिप्तता सामने आई थी। डीडीओ की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि लगभग 20 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई है।

बावजूद इसके, 22 मई 2025 को पीडी त्रिपाठी ने अंतिम जांच रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों को निर्दोष बताया और डीडीओ की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। ग्रामीणों ने इस रिपोर्ट को एकतरफा और रिश्वत से प्रेरित बताया है।

जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर.

डीएम ने दिए दोबारा जांच के आदेश

जब संदेश वाहक के संवाददाता ने यह मामला जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. के संज्ञान में आया, तो उन्होंने दोबारा जांच कराने की बात कही। डीएम ने कहा डीडीओ की रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई गई है, जबकि पीडी की रिपोर्ट उससे उलट है। ग्रामीणों की शिकायत पर गंभीरता से विचार करते हुए मैंने पुनः जांच के आदेश दिए हैं। सत्य सामने आने के बाद दोषियों से वसूली की जाएगी और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

जनपद में चर्चाओं का विषय बना मामला

इस प्रकरण को लेकर पूरे जिले में चर्चाएं तेज हैं। सवाल उठ रहा है कि डीडीओ की रिपोर्ट सही है या पीडी की? साथ ही, लोगों में यह भी चर्चा है कि हर बार डीडीओ की जांच को पीडी द्वारा शून्य कर दिया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की आशंका और गहरा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच किसी अन्य अधिकारी से कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। साथ ही, रिश्वतखोरी के आरोपों की भी अलग से जांच होनी चाहिए।

रिपोर्ट:- जाकिर खान।

 

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