DM सिद्धार्थनगर की किसानों से अपील: पराली न जलाएं, प्रदूषण और जुर्माने से बचें
Sandesh Wahak Digital Desk: जनपद सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी (DM) शिवशरणप्पा जी.एन. ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों की कटाई के बाद फसल अवशेष (पराली) को बिल्कुल न जलाएं। जिलाधिकारी ने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), नई दिल्ली द्वारा निर्धारित भारी अर्थदण्ड का प्रावधान है।
फसल अवशेष जलाने के गंभीर नुकसान
जिलाधिकारी ने किसानों को जागरूक करते हुए बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है:
- मृदा स्वास्थ्य: फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति और उसमें उपलब्ध लाभकारी कार्बन नष्ट हो जाती है। कार्बन की कमी से फसलें उर्वरकों का पूरी तरह से उपभोग नहीं कर पाती हैं।
- स्वास्थ्य और पर्यावरण: पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना बनी रहती है।
एनजीटी द्वारा निर्धारित अर्थदण्ड (जुर्माना)
डीएम ने बताया कि खेत में फसल अवशेष जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति हेतु एनजीटी द्वारा निम्न अर्थदण्ड के प्रावधान किए गए हैं:
| कृषि भूमि का क्षेत्रफल | अर्थदण्ड (प्रति घटना) |
| 2 एकड़ से कम | रु.5,000 |
| 2 एकड़ से 5 एकड़ तक | रु.10,000 |
| 5 एकड़ से अधिक | रु.30,000 |
सख्त कार्रवाई की चेतावनी: जिलाधिकारी ने आगे बताया कि खेत में फसल अवशेष जलाने की लगातार दो घटनाएं पाए जाने पर अर्थदण्ड के साथ-साथ दोषी को विभागीय योजनाओं से वंचित कर दिया जाएगा।
प्रबंधन और वैकल्पिक उपाय
डीएम शिवशरणप्पा जी.एन. ने किसानों से फसल अवशेष को न जलाकर इसके प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने का अनुरोध किया है।
- उपयोग किए जाने वाले यंत्र: मल्चर, हाइड्रोलिक एम.बी. प्लाऊ, श्रेडर, जीरो सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, सुपर सीडर आदि।
- लाभ: इन यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेष को खेतों में ही सड़ाकर कार्बनिक खाद तैयार की जा सकती है, जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहेगी।
डीएम ने यह भी कहा कि कटाई में इस्तेमाल हो रही कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट या स्ट्रा रीपर का प्रयोग नहीं पाए जाने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट: जाकिर खान
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