Siddharthnagar Electricity Strike: बिजली निजीकरण के विरोध में हड़ताल, ठप रहा कामकाज

Sandesh Wahak Digital Desk: बिजली विभाग के निजीकरण की आहट ने देशभर के बिजली कर्मियों को लामबंद कर दिया है। सिद्धार्थनगर में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला, जहां अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक ने कामकाज ठप कर अपना विरोध दर्ज कराया।

बिजली क्षेत्र के निजीकरण और केंद्र सरकार की नई नीतियों के विरोध में आज सिद्धार्थनगर के बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। ‘नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स’ के आह्वान पर आयोजित इस एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल में जनपद के सभी बिजली कर्मी शामिल हुए।

Siddharthnagar Electricity Strike: बिजली निजीकरण के विरोध में हड़ताल, ठप रहा कामकाज

क्यों हो रहा है विरोध?

हड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकार के दो बड़े फैसलों को वापस लेने की मांग करना है। कर्मचारियों का मानना है कि यह बिल पावर सेक्टर में निजी कंपनियों के वर्चस्व को बढ़ावा देगा। प्रस्तावित नई नीति नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को लेकर कर्मचारियों में असुरक्षा और निजीकरण का डर है।

Siddharthnagar Electricity Strike: बिजली निजीकरण के विरोध में हड़ताल, ठप रहा कामकाज

सिद्धार्थनगर में कामकाज ठप

गुरुवार दोपहर 12:00 बजे जिला मुख्यालय स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय (नौगढ़) पर भारी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी जमा हुए। देश के करीब 27 लाख बिजली कर्मियों के साथ सुर में सुर मिलाते हुए सिद्धार्थनगर के कर्मियों ने भी पूर्ण कार्य बहिष्कार किया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान योगेश बघेल, अनिल यादव, विनीत कुशवाहा, संदीप कुमार, यादवेश राय, राजेश कुमार, सचिन कुमार, दीना वर्मा और नीरज कुशवाहा समेत कई प्रमुख पदाधिकारी और कर्मचारी डटे रहे। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।

रिपोर्ट: जाकिर खान

 

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