Siddharthnagar News: सांसद जगदंबिका पाल की पहल लाई रंग, ककरहवा ICP को मिला मंत्रालय से अप्रूवल

Sandesh Wahak Digital Desk: भारत-नेपाल की सीमा पर स्थित ककरहवा बॉर्डर पर अब जल्द ही इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) की स्थापना होने जा रही है। इस प्रस्ताव को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने स्वीकृति दे दी है। इस नए ICP के निर्माण से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और आपसी संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। यह जानकारी सांसद जगदंबिका पाल ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी।

ककरहवा सीमा को लेकर मिली बड़ी मंजूरी

सांसद पाल ने बताया कि 7 मई 2025 को उन्होंने स्वयं भारत सरकार के गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर ककरहवा सीमा पर आव्रजन केंद्र (Immigration Office) स्थापित करने की मांग की थी। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में विस्तृत जांच कराई और माना कि ककरहवा एक भू-सीमा शुल्क स्टेशन (Land Customs Station) है, जिसे भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI) की विस्तार योजना के तीसरे चरण में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) के रूप में विकसित किया जाएगा।

ICP के संचालन की संभावित तारीख और नेपाल की स्थिति

पाल ने बताया कि LPAI के अनुसार, ICP का वाणिज्यिक संचालन 15 मई 2025 से शुरू होने की योजना थी। लेकिन नेपाल की ओर से जरूरी बुनियादी ढांचे और प्रक्रियाओं की कमी के चलते फिलहाल इसकी शुरुआत अटकी हुई है। नेपाल की ओर से जब तक जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं होतीं, तब तक यह ICP आधिकारिक तौर पर चालू नहीं हो सकता।

इस विषय पर नेपाल के प्रधानमंत्री से बात करने के लिए जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल नेपाल जाएगा, जिससे अटकी प्रक्रियाएं जल्द सुलझाई जा सकें।

यह सिद्धार्थनगर के लिए एक तोहफा है – नेपाल के पूर्व सांसद अमित शाह

प्रेस वार्ता में नेपाल के पूर्व सांसद एवं भारत-नेपाल मैत्री संघ के प्रतिनिधि अमित शाह ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि ककरहवा ICP दोनों देशों के बीच के रोटी-बेटी के रिश्ते को और मजबूत करेगा। उन्होंने इसे सिद्धार्थनगर के लिए एक बड़ा तोहफा बताया।

अमित शाह ने कहा कि ICP बनने से न केवल आम लोगों की आवाजाही में सहूलियत होगी, बल्कि यह व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बौद्ध टूरिज्म को भी नई ऊंचाई देगा। उन्होंने कहा कि लुंबिनी से सीधा ककरहवा के रास्ते भारत आना अब आसान होगा, जिससे बुद्धा सर्किट को मजबूती मिलेगी।

क्यों है यह ICP खास?

  • बौद्ध स्थलों से सीधा संपर्क: ICP बनने से सिद्धार्थनगर के बौद्ध स्थल सीधे बुद्धा सर्किट से जुड़ेंगे।
  • व्यापार को मिलेगी गति: व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और यात्रियों को आवागमन में आसानी होगी।
  • सांस्कृतिक संबंध होंगे मजबूत: भारत-नेपाल की सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
  • पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा: दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए सुविधा बढ़ेगी।

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