सिद्धार्थनगर: डुमरियागंज महादंगल में नेपाल और भारत के धुरंधरों ने दिखाया दम, डीएम ने किया शुभारंभ
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में राप्ती नदी के पावन तट पर स्थित परशुराम वाटिका शनिवार को शौर्य, शक्ति और संस्कृति के संगम की गवाह बनी। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर लगने वाले पारंपरिक मेले में ‘धर्म रक्षा मंच’ के तत्वाधान में दो दिवसीय भव्य “राम राम कुश्ती दंगल” का आगाज हुआ। इस दंगल में न केवल भारत के कोने-कोने से नामी पहलवान जुटे, बल्कि पड़ोसी मुल्क नेपाल के लड़ाकों ने भी अपने दांव-पेंच से दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

DM, SP और पूर्व विधायक ने किया ऐतिहासिक शुभारंभ
दंगल का औपचारिक शुभारंभ जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन और पूर्व विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने विधि-विधान से पूजन और फीता काटकर किया। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने भी खेल भावना की सराहना की।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने अखाड़े में उतरकर पुरुष वर्ग की पहली कुश्ती के लिए राजेश पहलवान (अयोध्या) व काला चीता (जौनपुर) का हाथ मिलवाया। वहीं महिला वर्ग में शिवांगी सिंह (नंदनीनगर, गोंडा) और हिमांशु यादव (राजस्थान) की कुश्ती का शुभारंभ कराकर नारी शक्ति को प्रोत्साहित किया। उद्घाटन मुकाबलों में अयोध्या के राजेश पहलवान और गोंडा की शिवांगी सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पटखनी देकर जीत के साथ आगाज किया।

क्यों खास है ‘राम राम दंगल’?
क्षेत्रीय राजनीति के दिग्गज और पूर्व विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने इस दंगल के नाम के पीछे की भावना साझा की। उन्होंने बताया कि कुश्ती की परंपरा यहाँ दशकों पुरानी है, लेकिन वर्ष 2024 में अयोध्या में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद, पूरे विश्व के सनातनी हर्षोल्लास में डूब गए थे। इसी राममय माहौल को देखते हुए इस आयोजन का नाम ‘राम राम दंगल’ रखा गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुश्ती जैसे खेल युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाते हैं, और यह दंगल इसी गौरवशाली भारतीय परंपरा को जीवित रखने का एक प्रयास है।
नेपाल से केरल तक: अखाड़े में भिड़े दिग्गजों के दांव
इस दो दिवसीय दंगल की ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां नेपाल, भूटान, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार जैसे राज्यों के अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने शिरकत की।

रोमांचक मुकाबलों का हाल
काठमांडू (नेपाल) के पंडित थापा ने केरल के काला पहलवान को चित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई। भूटान के चिम-चिम डोगरा और प्रयागराज के देवा पहलवान के बीच कांटे की टक्कर हुई, जिसमें भूटान के डोगरा विजयी रहे। गोरखपुर की नम्रता पहलवान ने बनारस की सोनम को हराकर अखाड़े में अपनी बादशाहत साबित की। उत्तर प्रदेश केसरी सर्वेश तिवारी (संतकबीर नगर) ने राजस्थान के ठाकुर जल्लाद सिंह को महज कुछ ही मिनटों में चित कर दिया, जिसे देखकर दर्शक झूम उठे।
इसके अलावा हरियाणा के सोनू और नेपाल के लक्की थापा के बीच मुकाबले में लक्की थापा ने बाजी मारी। वहीं, मेरठ के मोनू और सहारनपुर के सूरज सिंह के बीच हुई कुश्ती बराबरी पर छूटी, जिसने दर्शकों की सांसें थामे रखीं।
सुरक्षा और संचालन: अखाड़े से मंच तक
हजारों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सीओ बृजेश कुमार वर्मा और प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश यादव सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले रहे। मंच का संचालन अभिषेक त्रिपाठी ‘युवराज’ ने अपने चिर-परिचित अंदाज में किया, जबकि रेफरी के रूप में मंगला पहलवान (गाजीपुर) और गुड्डू पहलवान (गोरखपुर) ने निष्पक्ष निर्णय दिए।
जनप्रतिनिधियों और गणमान्य जनों का जमावड़ा
इस आयोजन में न केवल खेल, बल्कि राजनीति और समाज सेवा से जुड़ी हस्तियां भी जुटीं। सदर विधायक श्यामधनी राही, एसडीएम राजेश कुमार, ईओ सचिन कुमार और राजन गुप्ता सहित दीपेंद्र विक्रम सिंह और हेमंत जायसवाल ने विजयी पहलवानों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया।
देर शाम तक चले इस दंगल ने यह साबित कर दिया कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती के प्रति जबरदस्त दीवानगी है। अखाड़े की धूल और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष ने पूरे राप्ती तट को ऊर्जा से भर दिया।
रिपोर्ट: जाकिर खान

