Siddharthnagar News: कुलपति प्रो. कविता शाह से मिले कॉलेज प्राचार्य, संचालन की चुनौतियों पर सौंपा ज्ञापन
Sandesh Wahak Digital Desk: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में शनिवार को स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के संचालन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर प्राचार्य परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति प्रो. कविता शाह से मुलाकात की। इस दौरान परिषद के अध्यक्ष डॉ. गोविंद शरण सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और छात्रों से जुड़ी कई अहम चुनौतियों पर चर्चा की।
बैक पेपर की मांग पर कुलपति का जवाब
प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को अवगत कराया कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत आयोजित परीक्षाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए हैं, जिससे वे अगली कक्षा में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे छात्रों के लिए बैक पेपर की मांग की गई। इस पर कुलपति ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय नियमित रूप से बैक परीक्षा आयोजित नहीं कर सकता, लेकिन अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही संबंधित परिपत्र जारी किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के छात्र, जिनके जाति प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन पाए हैं, वे समर्थ पोर्टल पर 30 जुलाई तक पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं। इस पर कुलपति ने सुझाव दिया कि ऐसे छात्रों की एक सूची विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई जाए। विश्वविद्यालय यह सूची शासन द्वारा गठित समर्थ पोर्टल टीम को भेजेगा, ताकि पात्र छात्रों को पंजीकरण की अंतिम तिथि में छूट दी जा सके।
परीक्षा व्यय समायोजन की समयसीमा पर स्पष्टता
परिषद ने अनुरोध किया कि सेमेस्टर परीक्षा व्यय समायोजन हेतु प्रपत्र जमा करने की वर्तमान दो माह की अवधि को बढ़ाकर छह माह किया जाए। कुलपति प्रो. शाह ने इस पर स्पष्ट किया कि त्वरित वित्तीय प्रक्रिया सभी के हित में है और दो माह की समय सीमा पर्याप्त मानी जाती है। अधिक समय देने से कार्य में अनावश्यक विलंब होगा, जिससे कॉलेजों को नुकसान ही होगा।
नैक मूल्यांकन की अनिवार्यता पर भी हुई चर्चा
महाविद्यालयों को NACC (नैक) मूल्यांकन से संबंधित पत्र समाज कल्याण विभाग से प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्तमान में अधिकतर स्ववित्तपोषित कॉलेज इस प्रक्रिया को शुरू करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने नैक अनिवार्यता को तीन वर्षों तक स्थगित करने की मांग की और विश्वविद्यालय से प्रबंधकों के साथ बैठक कर उन्हें जागरूक करने का आग्रह किया।
कुलपति ने कहा कि नैक मूल्यांकन केवल छात्र हित में ही नहीं, बल्कि संस्थान और विश्वविद्यालय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक विकास के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष से नैक संस्थान द्वारा प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है, जिससे नए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। कुलपति ने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय नैक प्रक्रिया को लेकर प्रबंधकों के साथ बैठक करेगा और कार्यशालाओं व अन्य माध्यमों से महाविद्यालयों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
बैठक में मौजूद रहे ये प्रमुख चेहरे
इस प्रतिनिधिमंडल में परिषद के महामंत्री डॉ. अशोक भारतीय, डॉ. रामदरस मिश्र और अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव श्री दीनानाथ यादव भी बैठक में शामिल हुए।
रिपोर्ट: जाकिर खान।
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