सिद्धार्थनगर: थाईलैंड की रानी का आध्यात्मिक सफर, लुम्बिनी में टेका माथा; बुद्ध के चारों तीर्थों के किए दर्शन
सिद्धार्थनगर: भगवान बुद्ध के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा का नजारा शुक्रवार को उस समय देखने को मिला, जब थाईलैंड की रानी सिनेनाथ बिलासकल्यानी बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी पहुंचीं। उनकी इस यात्रा ने न केवल भारत और नेपाल के बीच के सांस्कृतिक संबंधों को गहरा किया, बल्कि बौद्ध धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था को भी जगजाहिर किया।
थाईलैंड की रानी सिनेनाथ बिलासकल्यानी इन दिनों भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों की यात्रा पर हैं। गुरुवार को कुशीनगर में महापरिनिर्वाण के दर्शन करने के बाद, वह शुक्रवार को नेपाल स्थित भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी पहुंचीं। यहां उन्होंने मायादेवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और विश्व शांति की कामना की।
मायादेवी मंदिर में भव्य स्वागत और शांति दीप का प्रज्वलन
रानी सिनेनाथ जैसे ही लुम्बिनी पहुंचीं, लुम्बिनी विकास कोष के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। रानी ने मायादेवी मंदिर के भीतर शांति दीप जलाया और वहां के ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी ली। उन्होंने उस स्थान का भी बारीकी से अवलोकन किया, जिसे बुद्ध का वास्तविक जन्मस्थल माना जाता है। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
कुशीनगर से लुम्बिनी तक का सफर
अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए रानी ने बताया कि उन्होंने बुद्ध के बताए उन चार प्रमुख तीर्थों के दर्शन का संकल्प लिया था, जिनका जिक्र स्वयं बुद्ध ने महापरिनिर्वाण के समय किया था। उन्होंने बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर में दर्शन के बाद लुम्बिनी को अपने सफर का अंतिम पड़ाव बनाया। कुशीनगर में उन्होंने बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा पर चीवर (धार्मिक वस्त्र) भी अर्पित किया था।
थाईलैंड के लिए वापसी
इस आध्यात्मिक यात्रा में थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री बोर्नवॉर्नसाक और कई बौद्ध भिक्षु भी उनके साथ रहे। लुम्बिनी दर्शन के बाद, शुक्रवार दोपहर लगभग 2 बजे रानी थाई एयर फोर्स के चार्टर्ड विमान से सीधे बैंकॉक के लिए रवाना हो गईं।
रिपोर्ट: जाकिर खान
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