सिद्धार्थनगर: रिश्वतखोर लेखपाल अमित पांडेय निलंबित, पट्टा दिलाने के नाम पर वसूले थे 34,000

सिद्धार्थनगर: सदर तहसील नौगढ़ में तैनात लेखपाल अमित कुमार पांडेय को रिश्वत मांगने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि लेखपाल ने एक गरीब ग्रामीण से सरकारी पट्टा दिलाने के बदले ‘साहब’ के नाम पर मोटी रकम की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला?

जोगिया उदयपुर के रहने वाले इमरान (पुत्र स्व. हबीबुलहक) ने जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. से लिखित शिकायत की थी। इमरान का आरोप था कि लेखपाल अमित कुमार पांडेय ने पट्टा प्रमाण पत्र दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की थी।

शिकायत के मुताबिक, सौदेबाजी के बाद पैसे किश्तों में दिए गए।

21 फरवरी 2025: ₹3,000 मोबाइल ट्रांसफर (ऑनलाइन) के जरिए दिए गए।

नकद भुगतान: ₹31,000 नकद दिए गए, जिसके गवाह पवन मिश्रा, राहुल मिश्रा और कौसर अजीम बने। इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद जब न तो काम हुआ और न ही पैसे वापस मिले, तो पीड़ित ने हार मानकर जिलाधिकारी की चौखट पर गुहार लगाई।

कल्याण सिंह मौर्य, उप जिलाधिकारी

एसडीएम की सख्त कार्रवाई

उप जिलाधिकारी (SDM) नौगढ़, कल्याण सिंह मौर्य ने बताया कि लेखपाल का यह कृत्य ‘उत्तर प्रदेश कर्मचारी आचरण नियमावली 1956’ का खुला उल्लंघन है। इसी के आधार पर अनुशासन एवं अपील नियमावली 1999 के तहत कार्रवाई करते हुए लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। उन्हें अब रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

15 दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट

प्रशासन ने इस मामले में ढिलाई न बरतते हुए नायब तहसीलदार सदर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि 15 दिनों के भीतर आरोपी लेखपाल के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करें। निलंबन अवधि के दौरान लेखपाल को केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही मिलेगा।

प्रशासन की इस कार्रवाई से तहसील परिसर में हड़कंप मचा हुआ है। एसडीएम ने साफ संदेश दिया है कि जनता के काम में बाधा डालने वाले या रिश्वत मांगने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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