भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत, कई इंडिकेटर्स सिंगल डिजिट में

Sandesh Wahak Digital Desk : भारत की अर्थव्यवस्था में इन दिनों सुस्ती के स्पष्ट संकेत नजर आ रहे हैं। नुवामा की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्रमुख आर्थिक संकेतक पिछले कुछ महीनों में काफी नीचे आ गए हैं, जो 2018-19 के मंदी के दौर जैसी स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं।

किन सेक्टर्स में दिख रही है गिरावट ?

  • बैंक क्रेडिट ग्रोथ: पहले 16% की रफ्तार से बढ़ रहा था, अब घटकर मात्र 9% रह गया है।

  • जीएसटी कलेक्शन: 11% की वृद्धि दर अब 6.2% पर सिमट गई है, जो कारोबारी गतिविधियों में कमी को दर्शाता है।

  • निर्यात वृद्धि: महज 6% की बढ़त, जो पिछले सालों के मुकाबले काफी कम है।

  • ऑटो सेक्टर: पैसेंजर वाहनों की बिक्री में सिर्फ 2% की ही बढ़ोतरी हुई है।

  • रियल एस्टेट: ग्रोथ रेट 4% पर आ गई है, जबकि कोर सेक्टर्स (इंफ्रा, स्टील, सीमेंट) की वृद्धि दर भी 3% तक सीमित हो गई है।

  • वेतन वृद्धि: कंपनियों ने अब वेतन बढ़ोतरी को भी आधा कर दिया है, जिससे खपत और बचत दोनों प्रभावित हुई हैं।

RBI की चिंता बढ़ी, लेकिन क्या समाधान होगा ?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल के महीनों में ब्याज दरों में बदलाव और लिक्विडिट मैनेजमेंट के जरिए अर्थव्यवस्था को सहारा देने की कोशिश की है। लेकिन, ग्लोबल मंदी का असर, महंगाई का दबाव और घरेलू मांग की कमजोरी अब भी चुनौती बनी हुई है।

क्या यह 2018-19 जैसी मंदी की ओर इशारा है ?

2018-19 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6% से नीचे आ गई थी, और अभी के संकेतक भी उसी तरह की सुस्ती दिखा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी निवेश और मॉनसून की बेहतर स्थिति कुछ हद तक संतुलन बना सकती है।

आम आदमी को क्या असर होगा ?

  • नौकरियों में सुस्ती और वेतन वृद्धि कम होने से युवाओं को रोजगार ढूँढ़ने में दिक्कत

  • कर्ज महंगा होने से होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन लेना मुश्किल।

  • शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का रिस्क बना रहेगा।

 

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