Social Media Influencers: जो सोशल मीडिया से करते हैं कमाई, उन्हें कितना देना होता है टैक्स?
Sandesh Wahak Digital Desk: सोशल मीडिया के ज़रिए आय अर्जित करने वालों की संख्या देश में तेजी से बढ़ रही है।
यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स अब करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं। ऐसे में आयकर विभाग ने भी इस डिजिटल पेशे को लेकर अपने रिटर्न फॉर्म्स में अहम बदलाव किए हैं।
अब सोशल मीडिया से कमाई करने वालों को टैक्स चुकाना होगा और इसके लिए उन्हें विशेष ITR फॉर्म और कोड निर्धारित किया गया है।
कौन भरता है कौन सा फॉर्म?
आयकर विभाग ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए ITR-3 और ITR-4 फॉर्म में “डिजिटल कंटेंट क्रिएटर” को एक अलग प्रोफेशनल कैटेगरी के रूप में जोड़ा है।
यूट्यूब या इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म से प्रमोशनल, विज्ञापन या ब्रांड डील्स से कमाई करने वाले यूज़र्स को अब प्रोफेशन कोड 16021 चुनना होगा।

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यदि कोई इन्फ्लुएंसर अनुमानित कराधान (Presumptive Taxation) स्कीम के तहत सेक्शन 44ADA का विकल्प चुनता है, तो वह ITR-4 भर सकता है।
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वहीं अगर वह अपने खर्चों, लाभ-हानि और अन्य स्रोतों की विस्तृत जानकारी देना चाहता है, तो उसे ITR-3 भरना होगा।
20 लाख से ज्यादा सालाना कमाई करने वालों पर फोकस
आयकर विभाग के अनुसार, बीते दो वर्षों में 20 लाख रुपये से अधिक सालाना कमाई करने वाले डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है।
कुछ मामलों में यह कमाई 2 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। ऐसे में विभाग अब इन करदाताओं पर कड़ी निगरानी रख रहा है, खासकर उन पर जो अब तक अपनी डिजिटल इनकम का ब्यौरा नहीं दे रहे थे।
F&O ट्रेडर्स के लिए भी नया कोड
सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, शेयर बाजार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स (F&O) से कमाई करने वाले ट्रेडर्स के लिए भी नया कोड जोड़ा गया है।
इस श्रेणी में आने वाले करदाता 21010 कोड के तहत अपनी जानकारी दर्ज करेंगे और उन्हें ITR-3 फॉर्म भरना होगा।
क्यों जरूरी है सही कोड का इस्तेमाल?
अब तक सोशल मीडिया क्रिएटर्स व डिजिटल मार्केटिंग पेशेवर अन्य कैटेगरीज के अंतर्गत अपना रिटर्न फाइल करते थे, जिससे पेशे की पहचान करना कठिन होता था। नए प्रोफेशनल कोड्स से अब न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि टैक्स कंप्लायंस में सुधार होगा।
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