सोनभद्र फर्जीवाड़ा: 1992 की तदर्थ नियुक्ति पर कूटरचित आदेश से वेतन जारी, 9 पर FIR

Sandesh Wahak Digital Desk: सोनभद्र जिले के शाहगंज स्थित जंग बहादुर सिंह इंटर कॉलेज में तीन सहायक अध्यापकों की फर्जी नियुक्ति और वेतन भुगतान का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी विवाद में बदल गया है। फर्जी शासनादेश (कूटरचित आदेश) के आधार पर वेतन जारी करने के मामले में तत्कालीन डीआईओएस समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह पूरा मामला वर्ष 1992 में हुई तदर्थ नियुक्ति से जुड़ा है।

मामले की जड़: 1992 से 2017 तक का घटनाक्रम

जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) जयराम सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटनाक्रम इस प्रकार है।

वर्ष/समय घटना का विवरण
1992 प्रधानाचार्य ने तदर्थ रूप में तीन सहायक अध्यापकों (गुलाब, ओम प्रकाश सिंह और राकेश कुमार श्रीवास्तव) की नियुक्ति की।
1993 तत्कालीन डीआईओएस ने नियुक्ति का अनुमोदन यह कहकर मना किया कि इससे संबंधित कोई शासनादेश नहीं है। अध्यापकों ने उच्च न्यायालय में वाद दायर किया।
2011 लंबे समय तक चला मुकदमा उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
दिसंबर 2016 तीनों सहायक अध्यापकों ने डीआईओएस कार्यालय में नियुक्ति और वेतन भुगतान संबंधी एक कूटरचित आदेश प्रस्तुत किया।
दिसंबर 2016 – मई 2017 तत्कालीन डीआईओएस ने इस फर्जी पत्र के आधार पर महज पांच माह का वेतन जारी किया।
मई 2017 तत्कालीन डीआईओएस ने स्वयं ही पत्राचार के दौरान शासनादेश फर्जी पाया और वेतन आहरण पर रोक लगा दी।
वर्तमान यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

शासन के निर्देश पर 9 लोगों पर केस

कूटरचित पत्र के आधार पर वेतन जारी करने को गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए, शासन ने सभी नौ लोगों को दोषी पाया और उन पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश जारी किया।

जिन पर मुकदमा दर्ज हुआ वर्तमान स्थिति
गुलाब, ओम प्रकाश सिंह, राकेश कुमार श्रीवास्तव तीन सहायक अध्यापक
प्रभुराम चौहान तत्कालीन DIOS (अब सेवानिवृत्त, गाजीपुर निवासी)
अतुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन आशुलिपिक (वर्तमान में मीरजापुर में तैनात)
अशोक कुमार तत्कालीन वरिष्ठ सहायक व लेखाकार (अब सेवानिवृत्त, बलिया निवासी)
हिमांशु सिंह कालेज के तत्कालीन प्रबंधक
अमरनाथ दुबे तत्कालीन प्रधानाचार्य (अब सेवानिवृत्त)
रामानुज शुक्ला तत्कालीन लिपिक (अब सेवानिवृत्त)

डीआईओएस जयराम सिंह ने बताया कि सभी नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधितों से वेतन की वसूली का आदेश अभी शासन से नहीं आया है।

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