MANREGA का नाम बदले जाने पर सोनिया गांधी ने बोला तीखा हमला

Sandesh Wahak Digital Desk: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने मनरेगा (MANREGA) का नाम बदले जाने और योजना को समाप्त किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के सर्वोदय के विजन पर आधारित थी और उसका खत्म होना हम सभी के लिए सामूहिक विफलता है। उनका कहना है कि ग्रामीण रोजगार से जुड़ी इस योजना को समाप्त करना देश के करोड़ों लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

सर्वोदय के विजन का अंत नैतिक विफलता

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक वेलफेयर स्कीम नहीं थी, बल्कि यह जनता को आजीविका का अधिकार देने वाली योजना थी। उन्होंने लिखा कि इस योजना ने ग्रामीणों को न केवल रोजगार दिया, बल्कि उन्हें गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान किया।

सोनिया गांधी ने लेख में कहा कि सर्वोदय के दृष्टिकोण को साकार करने वाली योजना का अंत होना हमारी सामूहिक नैतिक विफलता है। उन्होंने यह भी लिखा कि उन अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होना जरूरी है, जो समाज के हर वर्ग की सुरक्षा करते हैं।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद MANREGA समाप्त

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को ‘विकसित भारत – G Ram G’ विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी। इसके साथ ही यह अधिनियम बन गया और भारत के राजपत्र में इसकी अधिसूचना प्रकाशित की गई। इसके बाद मनरेगा (MANREGA) योजना आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई और उसकी जगह जी राम जी योजना ने ले ली।

MANREGA

संसदीय प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप

कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में नरेंद्र मोदी सरकार ने बिना किसी व्यापक चर्चा, परामर्श या संसदीय प्रक्रिया और केंद्र–राज्य संबंधों के सम्मान के बिना मनरेगा को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाए। उन्होंने कहा कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना तो केवल एक उदाहरण है, जबकि मनरेगा की वह पूरी संरचना, जो उसके प्रभाव के लिए आवश्यक थी, उसे ही पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है।

सोनिया गांधी ने यह भी याद दिलाया कि मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पहलों में से एक रही है और यह सबसे अधिक अध्ययन और मूल्यांकन की गई योजनाओं में भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि इन अध्ययनों में समाज के सबसे कमजोर वर्गों पर इसके परिवर्तनकारी प्रभावों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है।

राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा असर

अपने लेख में उन्होंने दावा किया कि राज्यों की वित्तीय स्थिति, जो पहले से ही गंभीर दबाव में है, अब और अधिक बिगड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के मांग आधारित स्वरूप को खत्म करने के साथ-साथ मोदी सरकार ने इसके विकेंद्रीकृत ढांचे को भी समाप्त कर दिया है।

सोनिया गांधी ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह यह कहकर भ्रामक दावे कर रही है कि रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। उनके मुताबिक, वास्तविकता में मनरेगा के मूल स्वरूप और अधिकार आधारित ढांचे को ही खत्म कर दिया गया है, जो इस योजना की आत्मा था।

 

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