सपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव का निधन, अखिलेश यादव ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शुमार और फर्रुखाबाद के मोहल्ला पल्ला निवासी पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव का शुक्रवार को निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। वह बीते कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थे और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे। शनिवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर छोटे सिंह यादव को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने पुष्प चक्र अर्पित कर शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात की और गहरी संवेदना व्यक्त की।

छोटे सिंह यादव समाजवाद की नींव के मजबूत स्तंभ थे- अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने कहा छोटे सिंह यादव हमारे परिवार का हिस्सा थे। नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के साथ उनका 60 वर्षों का लंबा साथ रहा। उन्होंने समाजवादी पार्टी की नींव रखने और उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम् भूमिका निभाई। आज उनका जाना हम सभी समाजवादियों के लिए अपूरणीय क्षति है।”

उन्होंने आगे कहा कि छोटे सिंह यादव ने समाजवाद की भावना को जमीनी स्तर तक पहुंचाया और गांव, गरीब और किसान की लड़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। छोटे सिंह यादव का समाजवादी आंदोलन से जुड़ाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि वैचारिक और सामाजिक भी था। वे कोऑपरेटिव मूवमेंट से भी जुड़े रहे और ग्रामीण भारत के विकास के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे। अखिलेश यादव ने बताया उन्होंने कभी समाजवादियों का साथ नहीं छोड़ा, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न रहे हों।

राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने का भरोसा: अखिलेश यादव

जब उनसे पूछा गया कि क्या छोटे सिंह यादव के परिवार को राजनीति में आगे मौका दिया जाएगा, तो अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि परिवार के लोग पहले से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और समाजवादी पार्टी की पूरी जिम्मेदारी होगी कि उनकी राजनीतिक विरासत को उचित सम्मान मिले और उसे आगे बढ़ाया जाए।

इस दौरान जब प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा गया, तो अखिलेश यादव ने कहा इस विषय पर आप सभी पहले से बेहतर जानते हैं कि स्थिति क्या है। बड़ी घटनाएं हो रही हैं, और जनता यह जानना चाहती है कि आखिर चूक कहां हुई।

समाजवाद की मिसाल थे छोटे सिंह यादव

छोटे सिंह यादव का जीवन संघर्ष, प्रतिबद्धता और विचारधारा के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि समाजवाद के जीवंत उदाहरण थे। आज उनका जाना पूरे समाजवादी परिवार के लिए एक भावनात्मक क्षण है। पार्टी और उनके समर्थकों के लिए अब यह जिम्मेदारी बनती है कि वे उनके दिखाए रास्ते और मूल्यों को आगे बढ़ाएं।

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