वोटर लिस्ट से सपा समर्थकों के नाम काटने की ‘साजिश’? अखिलेश के निर्देश पर चुनाव आयोग पहुंची सपा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर एक बड़ी साजिश का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। सपा का दावा है कि सूबे में चुन-चुनकर उनके समर्थकों और अल्पसंख्यकों के वोट काटे जा रहे हैं।

Shyam Lal Pal
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। सपा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की दर्जनों विधानसभाओं में भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी जानबूझकर सपा समर्थकों, विशेषकर ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवा रहे हैं।

क्या है मुख्य आरोप?

सपा का कहना है कि भाजपा ने एक खास रणनीति के तहत फॉर्म-7 (नाम काटने के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म) में मतदाताओं के नाम और उनके ईपिक (EPIC) नंबर पहले से प्रिंट करवा लिए हैं। इन फॉर्म्स को थोक के भाव बीएलओ (BLO) और ईआरओ (ERO) के पास जमा किया जा रहा है ताकि वैध मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से काटे जा सकें।

Samajwadi Party

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इन जिलों में ‘गड़बड़ी’ का दावा

ज्ञापन में फतेहपुर, मथुरा, मऊ, अमेठी, जौनपुर, बस्ती, भदोही, बलरामपुर, संभल, जालौन, कासगंज और गोंडा सहित कई जिलों का हवाला दिया गया है। सपा ने कुछ चौंकाने वाले उदाहरण भी पेश किए।

अमेठी: आरोप है कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने एक महिला बीएलओ पर नाम काटने का दबाव बनाया और उनके पति के साथ मारपीट कर मोबाइल छीन लिया।

मथुरा (मांट व बल्देव): यहां पोलिंग बूथों पर 400 से अधिक प्रिंटेड फॉर्म-7 जमा किए गए हैं।

जालौन: उरई में एक बीएलओ को 190 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए धमकाने और गांव छोड़कर जाने के लिए मजबूर करने का आरोप है।

बलरामपुर (तुलसीपुर): यहां एक बीएलओ ने लिखित शिकायत की है कि उससे जबरन 100 फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर कराए गए।

फतेहपुर (खागा): यहां एक भाजपा समर्थक द्वारा विशेष रूप से मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के नाम काटने के लिए फॉर्म जमा किए गए हैं।

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सपा की मांग: तत्काल निरस्त हों फर्जी फॉर्म

समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि साजिश के तहत जमा किए गए सभी फॉर्म-7 को तत्काल निरस्त किया जाए। फर्जी तरीके से नाम कटवाने की साजिश करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए फॉर्म-6, 7 और 8 की सूची बूथ स्तर पर सपा के एजेंटों को भी उपलब्ध कराई जाए।

सपा प्रतिनिधिमंडल (के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह और राधेश्याम सिंह) ने जोर देकर कहा कि अगर प्रशासन ने भाजपा के दबाव में आकर नाम काटे, तो यह लोकतंत्र की हत्या होगी। अब सबकी नजरें निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।

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