Moradabad News: सपा विधायक मोहम्मद फहीम का जाति प्रमाणपत्र निरस्त, जिलाधिकारी की जांच में ओबीसी सर्टिफिकेट मिला फर्जी
Moradabad News: बिलारी विधानसभा सीट से सपा विधायक मोहम्मद फहीम और उनके परिवार के लिए यह हफ्ता बड़ी मुसीबत लेकर आया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी जनपद स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने विधायक, उनके चाचा और दो चचेरी बहनों के ओबीसी (झोझा जाति) प्रमाणपत्रों को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया है।
इस पूरे विवाद की जड़ साल 2015 से जुड़ी है। बीजेपी नेता विश्वास यादव उर्फ लवली यादव ने विधायक फहीम के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। 19 जुलाई 2024 को उन्होंने साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी कि विधायक और उनका परिवार असल में सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखता है, लेकिन उन्होंने पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का फर्जी प्रमाणपत्र बनवा रखा है।
जांच में खुले कई बड़े राज
चार सदस्यीय जांच समिति ने जब पुराने रिकॉर्ड्स खंगाले, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
सामान्य वर्ग के थे दादा: जांच में पता चला कि विधायक के दादा मोहम्मद इस्लाम, जो कि लेखपाल थे, खुद को ‘सामान्य जाति’ का ही लिखते थे।
इलाके में जाति का गणित: समिति ने पाया कि बिलारी क्षेत्र में झोझा जाति (ओबीसी) के लोग नहीं रहते, बल्कि वहां तुर्क जाति की बहुलता है, जो सामान्य श्रेणी में आती है।
पहली बार 2015 में इस्तेमाल: विधायक फहीम ने पहली बार 2015 के जिला पंचायत चुनाव में खुद को ओबीसी बताकर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।
फिलहाल विधायक मोहम्मद फहीम लखनऊ में विधानसभा सत्र में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा है कि वे मुरादाबाद लौटने पर डीएम से मिलकर इस पर बात करेंगे। वहीं, उनके चाचा मोहम्मद उस्मान ने प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हमारे पास 1911 से लेकर 2018 तक के पुश्तैनी साक्ष्य हैं कि हम झोझा जाति के हैं। प्रशासन ने हमारे सबूतों को नजरअंदाज किया है। हम इस फैसले के खिलाफ मंडलीय आयुक्त (कमिश्नर) के पास अपील करेंगे।
गौरतलब है कि विधायक फहीम के परिवार का बिलारी की राजनीति में लंबे समय से दबदबा रहा है। उनके पिता हाजी मोहम्मद इरफान भी यहां से विधायक रहे थे। अब जाति प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद विधायक की सदस्यता पर भी तलवार लटक सकती है, क्योंकि इस मामले में कानूनी पेच फंस सकता है।
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