चौथी बार नजरबंद हुए सपा सांसद रामजीलाल सुमन, बोले- मेरे हाथ-पैर तुड़वाकर घर बैठा सकते हैं

Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन को बुधवार दोपहर एक बार फिर नजरबंद कर दिया गया। यह चौथी बार है जब उन्हें पुलिस ने किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने से पहले ही घर में नजरबंद कर दिया। सांसद सुमन एटा जिला मुख्यालय पर दलितों और पीड़ितों के समर्थन में धरना देने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही हरिपर्वत थाने की पुलिस उनके एमजी रोड स्थित आवास पर पहुंच गई और एटा रवाना होने से पहले उन्हें रोक लिया गया।

सांसद ने पुलिस से जताई नाराजगी

सपा सांसद की नजरबंदी की खबर जैसे ही फैली, बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता उनके घर के बाहर जुट गए। इस दौरान सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। नाराज सांसद ने पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार और डीआईजी से फोन पर बात करते हुए कहा हर बार मुझे ही क्यों रोका जाता है? क्या मैं आतंकवादी या नक्सलवादी हूं? अगर आप चाहते हैं कि मैं घर से बाहर न निकलूं, तो मेरे हाथ-पैर तुड़वा दीजिए।

धरना देने की अनुमति नहीं, पुलिस ने सुबह ही रोक लिया

सांसद सुमन का कार्यक्रम दोपहर 12 बजे एटा जाने का था, जहां वे भगवान बुद्ध और डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं और दलित बारात पर रोक जैसे मामलों को लेकर धरना देने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही सुबह 10 बजे एसीपी विनायक भोंसले के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उनके घर पर पहुंचकर उन्हें एटा जाने से रोक दिया।

सपा सांसद बोले- लोकतंत्र की हत्या हो रही है

नजरबंदी के बाद मीडिया से बातचीत में रामजीलाल सुमन ने कहा “आज देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात हैं। भाजपा सरकार इमरजेंसी पर तो कार्यक्रम करती है, लेकिन विपक्ष को बोलने तक की आज़ादी नहीं है। हर बार मुझे नजरबंद किया जा रहा है। न मथुरा जा सका, न कासगंज और अब एटा भी नहीं।” उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है और आवाज उठाने वालों को चुप कराया जा रहा है।

दलितों की बारात नहीं चढ़ने दी गई, मूर्तियां टूट रही हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं

रामजीलाल सुमन ने बताया कि एटा के अवागढ़ थाना क्षेत्र में एक दलित परिवार की बारात को रोका गया, वहीं तीन बार भगवान बुद्ध की मूर्तियों को तोड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन ने बस पुरानी मूर्तियों की जगह नई लगा दीं, लेकिन अपराधियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव के जन्मदिन पर उनके पोस्टर फाड़े गए, लेकिन पुलिस ने एफआईआर तक नहीं लिखी। यह सब दर्शाता है कि अपराधियों को खुली छूट दी जा रही है और विपक्ष को दबाया जा रहा है।

‘सिर्फ पुलिस ही हमें रोक रही है, जनता नहीं’

सपा सांसद ने कहा कि पुलिस प्रशासन का रवैया विपक्ष के साथ दमनकारी होता जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा अगर सरकार को हमारी पार्टी से इतनी परेशानी है, तो सपा पर बैन ही लगा दे। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ के डीआईजी, आगरा के एडीजी और पुलिस कमिश्नर ने एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन जब तक ज़मीनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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