बिहार चुनाव में पर्दानशीं महिला मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था, लागू होगा टीएन शेषन का 1994 का फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच, भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के 1994 के एक महत्वपूर्ण निर्देश को लागू करने का निर्णय लिया है। यह फ़ैसला उन पर्दानशीं (बुर्का या घूंघट पहनने वाली) महिला मतदाताओं से संबंधित है, जिनके लिए मतदान केंद्रों पर विशेष इंतज़ाम किए जाएँगे।
चुनाव आयोग ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि बिहार में ‘पर्दानशीं’ महिलाओं के लिए टीएन शेषन के 1994 के निर्देशों को लागू किया जा रहा है। 1994 में, टीएन शेषन ने जो विशेष दिशानिर्देश जारी किए थे, उनका उद्देश्य था कि मतदान अधिकारी ऐसी महिला मतदाताओं की संवेदनशीलताओं का सम्मान करते हुए ऐसी व्यवस्था करें, ताकि वे बिना किसी डर या पहचान संबंधी चुनौतियों के आसानी से अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें। यह कदम महिलाओं की निजता और उनके मताधिकार के अधिकार को सुरक्षित करने की दिशा में उठाया गया है।
पोलिंग बूथ पर महिला स्टाफ अनिवार्य
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के 1994 के आदेश के अनुसार, आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, ज़िला निर्वाचन अधिकारी और प्रिसाइडिंग ऑफ़िसर को यह सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी दी है कि महिला मतदाताओं के लिए महिला स्टाफ की उपस्थिति में मतदान करने की विशेष व्यवस्था हो।
आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिन मतदान केंद्रों पर महिला मतदाताओं की संख्या अधिक (लगभग 50 प्रतिशत या उससे अधिक) है और वे सामाजिक परंपरा के रूप में पर्दा प्रथा का पालन करती हैं, वहाँ कम से कम एक मतदान अधिकारी महिला होनी चाहिए। अगर पर्याप्त संख्या में महिला अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, तो रिटर्निंग ऑफ़िसर या प्रिसाइडिंग ऑफ़िसर को नियम 34(2) के तहत मतदान केंद्र पर किसी महिला को सहायक के रूप में नियुक्त करने का अधिकार होगा।
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