सपा की ‘पॉलिटिकल थर्मामीटर’ मीटिंग, अखिलेश ने रामपुर भेजा अपना भरोसेमंद ‘संदेशवाहक’
अखिलेश यादव की 8 अक्टूबर को प्रस्तावित मुलाकात से पहले अहम राजनीतिक संकेत
Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा और यही वजह है कि रविवार को पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप को चुपचाप रामपुर भेजा गया। मिशन था आज़म खान का मूड भांपना। सूत्रों के मुताबिक, यह कोई औपचारिक मुलाकात नहीं थी बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संवाद था, जिसके पीछे खुद अखिलेश यादव की मंजूरी थी।

संदेश साफ था 8 अक्टूबर की मुलाकात से पहले बर्फ पिघलनी चाहिए
रामपुर में बंद कमरे में हुई यह मुलाकात करीब तीन घंटे चली। गोप ने आज़म खान से राजनीतिक हालात, सपा की दिशा और आने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारियों पर विस्तार से बातचीत की। मुलाकात के बाद जो तस्वीरें बाहर आईं उनमें आज़म खान अरविंद गोप को प्यार से गले लगाते दिखे लेकिन राजनीति के गलियारों में यह तस्वीरें भावुकता से ज़्यादा “संदेश” मानी जा रही हैं।

अखिलेश ने भेजा अपना भरोसेमंद ‘संदेशवाहक’
यहां एक सवाल अहम है आखिर आज़म खान से मिलने भेजा गया अरविंद सिंह गोप ही क्यों? दरअसल, गोप न सिर्फ़ मुलायम सिंह यादव के सिपाही हैं, बल्कि 2017 के पारिवारिक संकट में जब अधिकांश नेता शिवपाल यादव के साथ खड़े थे, तब गोप ने अखिलेश का झंडा थामे रखा। पार्टी में आज भी उन्हें अखिलेश का सबसे भरोसेमंद और वफादार नेता माना जाता है। यही कारण है कि अखिलेश ने इस बार कोई बयानबाज़ी नहीं की, बल्कि गोप को भेजकर आज़म के रुख़ की ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ मांगी।

आज़म और अखिलेश के बीच की दूरी या धारणा का खेल ?
आज़म खान के जेल से बाहर आने के बाद से ही खबरें तैर रही थीं कि वे नाराज़ हैं, और बसपा के संपर्क में हैं। हालांकि आज़म ने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके समर्थकों के सुर लगातार बदलते रहे। अब जब अखिलेश 8 अक्टूबर को रामपुर पहुंचने वाले हैं, तो माना जा रहा है कि गोप की मुलाकात ने उस दूरी को कम करने की कोशिश की है।

तीन घंटे की बातचीत में क्या हुआ ?
गोप के करीबी सूत्र बताते हैं कि मुलाकात सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि बेहद राजनीतिक और रणनीतिक थी। दोनों नेताओं ने रामपुर और पश्चिमी यूपी की मुस्लिम राजनीति, संगठन के ढांचे और “बाहरी हस्तक्षेप” पर खुलकर चर्चा की। बताया जाता है कि गोप ने अखिलेश का संदेश साफ शब्दों में दिया ‘आप सपा की रीढ़ हैं, पार्टी में आपकी भूमिका पहले से और मज़बूत होगी’।
सियासी नतीजा क्या निकलेगा ?
अब नज़रें 8 अक्टूबर पर हैं। अगर अखिलेश और आज़म की मुलाकात सकारात्मक माहौल में होती है, तो यह सपा के लिए “पॉलिटिकल रिकवरी पॉइंट” साबित होगी। लेकिन अगर मुलाकात औपचारिक रही, तो यह साफ संकेत होगा कि रामपुर की सियासत अभी भी सुलग रही है।
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