स्पेस टेक्नोलॉजी क्रांति को नई दिशा में ले जाएंगे ऐसे युवा : पवन गोयनका

कुशीनगर में शुभांशु शुक्ला भी शामिल हुए, कहा- ये हमारे भविष्य की झलक

कुशीनगर। सेवरही विकास खंड के रकबा जंगली पट्टी स्थित जीरो तटबंध के किनारे चार दिवसीय रॉकेट्री और कैनसेट प्रतियोगिता के अंतिम दिन मुंबई की टीम विजेता, गुजरात की द्वारिका टीम रनर अप घोषित की गयी। इन-स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोइनका बोले ऐसे ही युवा भारत को स्पेस टेक्नोलॉजी क्रांति को नई दिशा में ले जाएंगे। देश के युवा एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने कहा यह युवा भविष्य को बेहतर दिशा देंगे।

देश की पहली रॉकेट्री और कैनसेट प्रतियोगिता के आखिरी दिन गुरूवार को प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचे एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने प्रतिभागियों का हौंसला बढाया। कहा इस प्रतियोगिता में देश भर के होनहार प्रतिभाग कर अपनी बेहतर प्रतिभा का प्रदर्शन किये। होनहारों ने अपना रॉकेट और सैटेलाइट बनाकर लॉन्च किया। इस लॉन्चिंग में देश के भविष्य की झलक दिखी। इन बच्चों की क्षमता पर गौरवान्वित करने वाली है। शुक्ला ने कहा ऐसे बच्चा अपना रास्ता ढूंढ़कर अपनी मंजिल तक पहुंच जायेंगे।

अंतिम दिन छात्रों ने बैक-टू बैक 8 रॉकेट और 5 कैनसेट लॉन्च किए। बुधवार को बारिश के बीच 8 रॉकेट और 5 कैनसेट लॉन्च किए गए थे, जबकि मंगलवार को 10 रॉकेट ने उड़ान भरी थी। रोबोट डॉग ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था। प्रतियोगिता में देश के 47 कॉलेजों से आए 600 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें 133 छात्राएं भी थीं। इन-स्पेस कंपनी ने प्रतियोगिता का आयोजन कराया।

शुभांशु बोले- गगनयान के लिए बनाना है अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन

एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने प्रतियोगिता में भाग ले रहे छात्रों से बातचीत कि और कहा, हमें 2035 तक मिशन गगनयान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन बनाकर चांद पर जाना है। इस पर काम तेजी से चल रहा है। इसरो पूरी मजबूती से इस दिशा में कार्य कर रहा है।

भारत में पहली बार हमने इस तरह का प्रयोग किया: पव

इन-स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोइनका ने प्रतिभागी छात्र व छात्राओं से बातचीत की। कहा कि ऐसे युवा ही भारत को अगली स्पेस टेक्नोलॉजी क्रांति की दिशा में ले जाएंगे। भारत में पहली बार हमने इस तरह का प्रयोग किया है। जो पूरी तरह सफल रहा है। यहां नए बच्चों ने खुद रॉकेट और कैनसेट बनाए और सफलता पूर्वक लॉन्च भी किए। हो सकता है कि हम छोटे रॉकेट के लॉन्चिंग के लिए यहां पर परमानेंट लॉन्चिंग पैड बनाएंगे। जहां स्टूडेंट कभी भी आकर लॉन्चिंग सीख सकते हैं।

प्रतिभागियों की जुबानी

हैदराबाद ने आयी श्रुति ने कहा हमारी टीम पिछले तीन दिनों से यहीं है। हमारा कैनसैट सफलतापूर्वक लॉन्च होकर पैराशूट के सहारे रिकवर हुआ। रिजुल ने कहा हमारा कैनसैट परफेक्ट डाटा और टाइमिंग के साथ रिकवर हुआ। प्रतियोगिता से हमने सीखा कि डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स मेंटेनेंस, कोऑर्डिनेशन और कम्युनिकेशन कैसे किया जाता है।

रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल

 

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