सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर तीखा हमला, कहा- वह देश और अपनी पार्टी दोनों के लिए एक हैं पहेली
Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राहुल गांधी को लेकर दिए गए बयान भारतीय राजनीति के फेल प्रोडक्ट का पुरजोर समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक करियर, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विदेश दौरों पर कड़े सवाल उठाते हुए उन पर जमकर निशाना साधा। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जब भी विदेश दौरों पर जाते हैं, तो संदिग्ध लोगों से मिलते हैं और भारत लौटने के बाद देश के खिलाफ माहौल बनाते हैं तथा भारत विरोधी प्रचार करते हैं।
जल बिन तड़पती मछली जैसी है कांग्रेस की स्थिति
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, सत्ता से बाहर रहते हुए कांग्रेस पार्टी की स्थिति जल बिन तड़पती मछली जैसी हो गई है। कांग्रेस का मूल मंत्र हमेशा से सत्ता में रहते हुए लूट-खसोट करना, समाज में फूट डालना और भारतीय धर्म व संस्कृति के प्रति मन में घृणा रखना रहा है। दुर्भाग्य से इसके ड्राइविंग इंजन देश में विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी इस समय देश से बाहर यानी चंपा (वियतनाम का प्राचीन नाम) में विचरण कर रहे हैं। वे देश और अपनी खुद की पार्टी, दोनों के लिए एक पहेली बन चुके हैं। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार उपलब्धियों से भरा हुआ है, वहीं राहुल गांधी का ट्रैक रिकॉर्ड कांग्रेस पार्टी के लिए सिर्फ समस्याओं की फेहरिस्त लेकर आया है। आज कांग्रेस ने न केवल अपने भविष्य को खतरे में डाला है, बल्कि देश के संवैधानिक ढांचे को भी दांव पर लगा दिया है।
हर जगह फेल रहे हैं राहुल गांधी
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वे तथ्यों और सबूतों के आधार पर यह साबित कर सकते हैं कि राहुल गांधी एक ‘फेल प्रोडक्ट’ हैं। उन्होंने उनके अतीत का जिक्र करते हुए कहा, हमारी पीढ़ी के लोगों को याद होगा कि उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में एक राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज और शूटिंग एथलीट के रूप में दाखिला मिला था, लेकिन उसके बाद वह अपने निशाने चूकते रहे और देश ने शूटिंग में उनकी कोई खास उपलब्धि नहीं देखी। यह उनकी जीवन की पहली बड़ी विफलता थी।
अपने परिवार की परंपरा का पालन करते हुए वह उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। 1996 से 1999 के बीच उन्होंने ‘मॉनिटर’ नाम की एक ब्रिटिश कंपनी के लिए काम किया, जो बाद में बंद हो गई। इसके बाद वह ‘बैकऑप्स’ नामक दूसरी ब्रिटिश कंपनी में पार्टनर बने और 2003 से 2009 तक उसके डायरेक्टर रहे, लेकिन बाद में वह कंपनी भी बंद हो गई। उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ ‘प्रोडक्ट’ ही फेल नहीं हुआ, बल्कि उससे जुड़ी कंपनियां भी बंद हो गईं।
राजनीतिक जीवन के प्रयोग भी पूरी तरह विफल
भाजपा सांसद ने कहा कि 2014 में जब कांग्रेस ने राहुल गांधी को अपना अघोषित नेता बनाया, तो लोकसभा चुनाव में पार्टी अपनी अब तक की सबसे न्यूनतम संख्या पर सिमट गई। उन्होंने कहा कि बचपन में हम सपना देखते थे कि बीजेपी अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल करेगी और पीएम मोदी के नेतृत्व में वह सच हुआ, लेकिन यह भी सोचते थे कि क्या कभी कांग्रेस 100 सीटों से नीचे जा सकती है? 2014 में वह 50 सीटों से भी नीचे आ गई।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी ने कांग्रेस के भीतर कई प्रयोग किए। उन्होंने यूथ कांग्रेस के चुनावों को लोकतांत्रिक बनाने की बात कही, लेकिन देश ने देखा कि वहां भीड़ तंत्र और एआई समिट में नग्न प्रदर्शन के अलावा कुछ नहीं दिखा। उन्होंने पार्टी में आंतरिक चुनावों के जरिए उम्मीदवार तय करने का प्रयोग किया, जो पूरी तरह विफल रहा। उन्हें एक ‘युवा नेता’ के तौर पर लॉन्च किया गया था, लेकिन वे हर मोर्चे पर असफल साबित हुए। 2019 में खुद को ‘शिव भक्त’ या हिंदू दिखाने का उनका प्रयोग भी फेल हुआ, और 2024 में सद्दाम हुसैन जैसी दाढ़ी रखकर भारत विरोधियों के सुर में सुर मिलाने के बावजूद कांग्रेस तीन अंकों (100 सीटों) तक नहीं पहुंच पाई।
संसद के आचरण पर सवाल
राहुल गांधी की परिपक्वता पर सवाल उठाते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पुस्तक ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ के अध्याय 24 में 2010 की अपनी भारत यात्रा के दौरान राहुल गांधी से हुई मुलाकात का जिक्र किया है। ओबामा ने लिखा है कि उनमें “एक तरह की घबराहट और अपरिपक्वता थी, वे किसी ऐसे छात्र की तरह लग रहे थे, जिसने अपना कोर्स वर्क तो पूरा कर लिया हो और वह शिक्षकों को प्रभावित करने के लिए उत्सुक हो, लेकिन गहराई में देखें तो उसमें उस विषय में महारत हासिल करने की न तो क्षमता थी और न ही कोई जुनून।”
उन्होंने संसद की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाने के बाद अपनी सीट पर लौटकर आंख मारने का जो इशारा राहुल गांधी ने किया था, क्या वह किसी वरिष्ठ राजनेता से अपेक्षित परिपक्वता, गंभीरता और स्थिरता को दर्शाता है? अंत में उन्होंने कहा कि जब-जब वे विदेश जाते हैं, संदिग्ध लोगों से मिलते हैं और देश विरोधी बयानों के जरिए अराजकता फैलाने की कोशिश करते हैं।

