प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, निर्माण कार्यों पर रोक की बजाय नए विकल्प तलाशे जाएं

Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली-NCR में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई की है। अदालत ने CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) को सुझाव दिया है कि सर्दियों में निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगाने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार किया जाए। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि निर्माण गतिविधियों पर पाबंदी से दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ता है।

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि हमें श्रमिकों की आजीविका का भी ध्यान रखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के एक और बड़े कारण, यानी पराली जलाने पर भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि अब पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ जेल भेजने और मुकदमा चलाने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

सीजेआई बीआर गवई ने कहा, हम किसानों का सम्मान करते हैं और वे हमारे दिल में हैं, क्योंकि वे हमें अन्न देते हैं। लेकिन उन्हें पर्यावरण को प्रदूषित करने की छूट नहीं दी जा सकती। अदालत का कहना है कि दिल्ली-NCR और पड़ोसी राज्यों में सर्दियों के दौरान हवा को जहरीला होने से रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करना बेहद ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पराली जलाने के मामले में अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, बल्कि सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है CAQM

CAQM का पूरा नाम कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट है, जिसे हिंदी में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग कहते हैं। इसे अगस्त, 2021 में दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य काम दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं की निगरानी करना, उनका अध्ययन करना और समाधान खोजना है।

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