सुप्रीम कोर्ट से शब्बीर शाह को मिली जमानत, NIA के पुराने सबूतों पर कोर्ट ने उठाए सवाल

Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत मंजूर कर ली है। साल 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत में बंद शाह को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसे शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर गौर किया।

लंबी हिरासत और धीमा ट्रायल: शाह की ओर से दलील दी गई कि वे पिछले 6 साल से जेल में हैं। इस मामले में कुल 400 गवाह हैं, लेकिन अभी तक केवल 15 गवाहों की ही गवाही हो पाई है। ट्रायल की इस रफ्तार से फैसला आने में दशकों लग सकते थे।

उम्र का हवाला: शब्बीर शाह की उम्र अब 74 साल हो चुकी है। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें राहत देना उचित समझा।

पुराने सबूतों पर सवाल: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NIA से पूछा कि क्या 1990 के दशक के पुराने भाषणों के आधार पर किसी को इतने लंबे समय तक जेल में रखना सही है? कोर्ट ने एजेंसी से नए और समकालीन सबूत पेश करने को कहा था, जिस पर ठोस आधार न मिलने पर कोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी।

शर्तों के साथ मिली राहत

हालांकि शाह को जमानत मिल गई है, लेकिन कोर्ट ने उन पर कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। वे जांच और ट्रायल की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। जेल से बाहर रहते हुए वे किसी भी तरह की गैरकानूनी या संदिग्ध गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। उन्हें अपना पासपोर्ट और अन्य यात्रा दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं (शर्तों के विस्तृत विवरण के अनुसार)।

ज्ञात हो कि NIA का आरोप था कि शब्बीर अहमद शाह जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने और भारत से अलग करने की साजिश का हिस्सा थे। उन पर टेरर फंडिंग के जरिए विदेशी पैसा जुटाने और घाटी में पत्थरबाजी व अन्य हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

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