सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर केंद्र को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने मंगा जवाब

Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuck) की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हुई हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर सेंट्रल जेल के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। यह याचिका उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा 2 अक्टूबर को दाखिल की गई थी, जिसमें वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग की गई है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को लद्दाख से गिरफ्तार किया गया था तथा वर्तमान में वे जोधपुर की एक जेल में बंद हैं। इनकी गिरफ्तारी उस समय की गई जब लद्दाख में इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाए रखने की मांग को लेकर प्रदर्शन और विरोध तेज हो गए थे।

गीतांजलि अंगमो ने अपनी याचिका में कहा है कि वांगचुक की गिरफ्तारी राजनीतिक कारणों से की गई है और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि उनकी हिरासत राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित नहीं है, बल्कि एक सम्मानित पर्यावरणविद् और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थक को चुप कराने की साजिश है।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर केंद्र को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने मंगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और सुनवाई

यहां जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई करते हुए कहा है कि सरकार को इस पर जवाब देना होगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा, “आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?” इस पर वकील कपिल सिब्बल, जो गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश हुए, ने पलट कर पूछा, “कौन सा हाईकोर्ट?”

कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि हिरासत अवैध और मनमानी है, और परिवार को इसके आधार तक नहीं बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह एनएसए की धारा 3(2) के तहत की गई निवारक हिरासत है, जो गैरकानूनी है।

वहीं केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हिरासत के आधार बंदी (वांगचुक) को पहले ही सौंपे जा चुके हैं, और वह यह जांच करेंगे कि क्या उनकी पत्नी को भी इसकी प्रति दी जा सकती है।

14 अक्टूबर को अगली सुनवाई

वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 14 अक्टूबर निर्धारित की है। वहीं इस याचिका के अनुसार, सोनम वांगचुक की हिरासत का असली मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर बोलने से रोकना है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल रिहाई की मांग की गई है।

 

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