बंगाल और तमिलनाडु में मतदाता सूची संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग से मांगा जवाब
Sandesh Wahak Digital Desk: देशभर में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। बंगाल और तमिलनाडु में जारी इस प्रक्रिया पर दाखिल छह याचिकाओं पर मंगलवार (11 नवंबर 2025) को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और याचिकाकर्ताओं से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर वह इस प्रक्रिया को लेकर इतने आशंकित क्यों हैं।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि अगर वे चुनाव आयोग के जवाब से संतुष्ट होते हैं तो वह इस पूरी प्रक्रिया को रद्द कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मामले की सभी रिट याचिकाओं पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
तमिलनाडु में एसआईआर के खिलाफ राज्य की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), कांग्रेस और सीपीआई(एम) ने याचिकाएं दाखिल की हैं। वहीं पश्चिम बंगाल के मामले में कांग्रेस ने याचिका दायर की है। इन दलों का कहना है कि मतदाता सूची के संशोधन की यह प्रक्रिया अत्यधिक जल्दबाजी में की जा रही है, जिससे लाखों मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो सकते हैं।
डीएमके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि पहले मतदाता सूची को रिवाइज करने में तीन साल तक का समय लगता था, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने इसे महज़ एक महीने में पूरा करने की बात कही है। सिब्बल ने कहा कि यह जल्दबाजी लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर डाल सकती है।
“अगर संतुष्ट हुए तो रद्द कर देंगे प्रक्रिया”
यहां सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, आपने अपना काउंटर दाखिल कर दिया है, हम नोटिस जारी कर रहे हैं। अगर हम संतुष्ट हुए कि प्रक्रिया में गड़बड़ी है, तो इसे रद्द कर देंगे। इस टिप्पणी के बाद कोर्ट ने चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है।
दरअसल मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की शुरुआत सबसे पहले बिहार से जून 2025 में हुई थी। हालांकि बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके खिलाफ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल फेडरेशन फॉर इंडियन वूमेन सहित कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। बिहार से जुड़े मामलों पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर निगाहें
दरअसल बंगाल, तमिलनाडु और बिहार में एसआईआर को लेकर उठे सवालों ने देशभर में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में हेरफेर कर विपक्षी वोटरों को हटाने की कोशिश की जा रही है, जबकि चुनाव आयोग का दावा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के जवाब से कितना संतुष्ट होता है। क्योंकि उसके अगले फैसले पर ही एसआईआर का भविष्य तय होगा।
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