सड़क पर किस ओर चलना सुरक्षित ! ‘सुप्रीम कोर्ट’ ने केंद्र और NHAI से मांगा जवाब
Sandesh Wahak Digital Desk: देश में सड़क पर बाईं ओर चलने के नियम को लेकर बहस छिड़ गई है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच चुका है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से पूछा है कि क्या भारत में भी विदेशों की तरह पैदल यात्रियों के लिए सड़क की दाईं ओर चलने का नियम बनाया जा सकता है?
यह मामला जबलपुर निवासी ज्ञान प्रकाश की ओर से दायर की गई एक याचिका के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने मौजूदा नियम को लेकर सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है।
क्या है याचिका का आधार ?
याचिकाकर्ता ज्ञान प्रकाश का दावा है कि 2022 में हुए 50 हजार सड़क हादसों में 18 हजार मौतें पैदल यात्रियों की हुईं। उनका तर्क है कि अगर पैदल यात्री सड़क की दाईं ओर चलें, तो उन्हें सामने से आने वाले वाहनों को देखने में आसानी होगी। इससे वे समय रहते खुद को सुरक्षित कर सकते हैं और हादसों की संभावना घट सकती है।
भारत में बाईं ओर चलने का नियम क्यों ?
दरसल भारत में सड़क पर बाईं ओर चलने का नियम Road Regulations, 1989 के तहत लागू है। इसके अनुसार, पैदल यात्रियों को हमेशा सड़क की बाईं ओर चलना चाहिए। बाईं ओर चलने से पीछे से आने वाले वाहनों के साथ गति और दिशा का तालमेल बनाना आसान होता है। भारत की सड़क संरचना, जैसे बस स्टॉप, फुटपाथ और ट्रैफिक लाइट, सब कुछ बाईं ओर केंद्रित है। दरसल यह सिस्टम ब्रिटिश ट्रैफिक नियमों से प्रेरित है, जिसे भारत ने आज़ादी के बाद भी अपनाए रखा।

दाईं ओर चलने के पक्ष में तर्क
दरअसल याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर पैदल यात्री दाईं ओर चलेंगे तो, सामने से आने वाला ट्रैफिक सीधा दिखेगा, जिससे खतरा कम होगा। वहीं ड्राइवर से आंखों का संपर्क संभव होगा, जिससे पैदल यात्री को देखे जाने की संभावना बढ़ जाती है। पीछे से आने वाली गाड़ी की तुलना में सामने से आने वाली गाड़ी से संभावित टक्कर से बचाव आसान होता है।
कहां-कहां लागू है दाईं ओर चलने का नियम ?
दुनिया के कई देशों में पैदल यात्रियों के लिए सड़क पर दाईं ओर चलने का नियम है, जिसमें- अमेरिका, कनाडा, यूरोप के अधिकतर देश शामिल हैं। वहीं कुछ देशों में अब भी बाईं ओर चलने का नियम है, जैसे- ब्रिटेन, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड दाएं चलने वाले देशों में शामिल है। यहां माना जाता है कि इससे पैदल यात्री ड्राइवर की हरकतों को पहले ही भांप सकते हैं, जिससे हादसे टाले जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगा जवाब
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और NHAI से 10 नवंबर तक आंकड़ों और विश्लेषण के साथ जवाब मांगा है। यह साफ संकेत है कि कोर्ट सड़क सुरक्षा को लेकर चिंतित है और किसी भी संभावित सुधार के लिए तैयार है।

