SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर रखने की मांग वाली याचिका पर अहम कदम उठाते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने इस मामले में चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में मांग की गई है कि क्रीमी लेयर को एससी-एसटी आरक्षण का लाभ न मिले और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।

सुनवाई के लिए SC की सहमति

इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। अदालत ने SC-ST रिजर्वेशन में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर सुनवाई करने का फैसला किया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि आरक्षण का लाभ ज्यादातर अनुसूचित जाति और जनजाति (SC-ST) के अमीर और मजबूत तबके उठा रहे हैं, जबकि वास्तव में जरूरतमंद और गरीब वर्ग पीछे छूट रहे हैं।

एक अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही करीब बीस साल पुराने फैसले को पलटते हुए यह कहा था कि राज्य सरकारें अनुसूचित जाति (SC-ST) के कोटे के भीतर सब-कैटेगरी बना सकती हैं। अदालत की बेंच ने यह भी स्पष्ट किया था कि अनुसूचित जाति को उनकी जातियों के आधार पर बांटना संविधान के आर्टिकल 341 का उल्लंघन नहीं करता है। सात जजों की बेंच में शामिल जस्टिस बीआर गवई ने यह राय दी थी कि राज्यों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समूहों के भीतर क्रीमी लेयर की पहचान करने और उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित करने के लिए एक ठोस नीति बनानी चाहिए।

केंद्र सरकार का रुख

हालांकि नौ अगस्त 2024 को केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) आरक्षण में क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट लागू नहीं करेगी। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि एनडीए सरकार बीआर अंबेडकर के बनाए संविधान से बंधी हुई है, जिसमें एससी और एसटी कोटे में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है।

अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा नोटिस के बाद यह देखना अहम होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं और आने वाले समय में आरक्षण नीति को लेकर क्या नया मोड़ आता है।

 

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