न्यायिक प्रक्रिया में AI के दुरुपयोग पर Supreme Court का सख्त रुख
Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के दुरुपयोग को लेकर कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अदालत का फैसला AI से तैयार किए गए फर्जी या अस्तित्वहीन निर्णयों पर आधारित पाया जाता है तो इसे मात्र त्रुटि नहीं माना जाएगा, बल्कि यह कदाचार के बराबर होगा और इसके कानूनी परिणाम होंगे। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों की गंभीरता न्यायिक प्रक्रिया की शुचिता से जुड़ी है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
पीठ की टिप्पणी और नोटिस जारी
दरअसल 27 फरवरी 2026 को जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने इस मुद्दे की विस्तार से जांच करने की बात कही। अदालत ने आर वेंकटरमनी, तुषार मेहता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि वह निचली अदालत द्वारा AI से तैयार गैर-मौजूद या कथित निर्णयों पर भरोसा किए जाने के प्रभाव और जवाबदेही की पड़ताल करना चाहती है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस प्रकार के निराधार और फर्जी फैसलों पर आधारित निर्णय लेना केवल निर्णय में गलती नहीं है। इसे कदाचार माना जाएगा और संबंधित पक्ष को इसके कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा संस्थागत दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है और इसकी गहराई से जांच आवश्यक है।
आंध्र प्रदेश HC के आदेश से जुड़ा मामला
दरअसल यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तब आया जब वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जनवरी के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। निचली अदालत ने विवादित संपत्ति की भौतिक विशेषताओं के विश्लेषण के लिए एक अधिवक्ता-आयुक्त नियुक्त किया था। याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता-आयुक्त की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, लेकिन निचली अदालत ने अगस्त में अपने आदेश में उन आपत्तियों को खारिज कर दिया और कुछ निर्णयों पर भरोसा किया।
AI से तैयार फैसलों का विवाद
याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि जिन फैसलों का हवाला दिया गया, वे अस्तित्वहीन और फर्जी थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस आपत्ति पर विचार करते हुए पाया कि संबंधित फैसले AI द्वारा तैयार किए गए थे। हालांकि हाईकोर्ट ने सावधानी बरतने की चेतावनी देते हुए गुण-दोष के आधार पर मामले का निर्णय किया और निचली अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए दीवानी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई और नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को तय करते हुए निर्देश दिया कि विशेष अनुमति याचिका के निपटारे तक निचली अदालत अधिवक्ता-आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर कोई आगे की कार्यवाही न करे।
इससे पहले 17 फरवरी को एक अलग मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने AI उपकरणों से तैयार की गई याचिकाओं को दाखिल करने के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से स्पष्ट है कि न्यायिक प्रक्रिया में AI के इस्तेमाल को लेकर अदालत सतर्क है और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई के संकेत दे चुकी है।
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