Aravali संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- नई रिपोर्ट आने तक नहीं जारी होगा खनन पट्टा
Sandesh Wahak Digital Desk: अरावली (Aravali) के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक अरावली की सटीक परिभाषा तय नहीं हो जाती और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती, तब तक कोई नया खनन पट्टा जारी नहीं किया जाएगा। अदालत ने कहा कि अरावली की परिभाषा की पुनः जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया जाएगा।
नए खनन पट्टों पर रोक जारी
शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रारंभिक मुद्दों के समाधान तक किसी भी नए खनन पट्टे को मंजूरी नहीं दी जाएगी। पर्यावरण मंत्रालय विशेषज्ञ समिति के लिए नामों का सुझाव देगा। साथ ही मामले से जुड़े वरिष्ठ वकीलों से भी विशेषज्ञों के नाम मांगे गए हैं। समिति की रिपोर्ट आने तक अरावली क्षेत्र में सभी नए खनन पट्टों पर रोक जारी रहेगी।
“Aravali क्या है, अभी तक किसी को नहीं पता”
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि समस्या यह है कि अभी तक किसी को स्पष्ट रूप से पता नहीं है कि अरावली (Aravali) क्या है। यह टिप्पणी उस समय की गई जब वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अपने एक मुवक्किल का पक्ष रखा, जिसने दस साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद खनन पट्टा हासिल किया था। कोर्ट ने साफ कहा कि फिलहाल नए पट्टे जारी नहीं होंगे और जिन कार्यों के लिए लाइसेंस दिए गए हैं, उन्हें भी अस्थायी रूप से रोकना होगा।
100 मीटर नियम को लेकर विवाद
दरअसल ये पूरा विवाद अरावली (Aravali) की नई परिभाषा, जिसे 100 मीटर नियम कहा जा रहा है, को लेकर है। नई व्यवस्था के अनुसार केवल वही भू-आकृतियां अरावली पहाड़ी मानी जाएंगी जिनकी ऊंचाई आसपास के धरातल से 100 मीटर या उससे अधिक है। इससे कम ऊंचाई वाली पहाड़ियां अरावली की श्रेणी में शामिल नहीं होंगी, जिससे उन क्षेत्रों में खनन, रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का रास्ता खुल सकता है।
वहीं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा था कि अरावली (Aravali) के कुल 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से केवल 217 किलोमीटर, यानी लगभग 0.19 प्रतिशत हिस्से में ही माइनिंग की अनुमति है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि 100 मीटर की माप केवल जमीन से चोटी तक की ऊंचाई भर नहीं है, बल्कि इसका निर्धारण व्यापक मापदंडों के आधार पर किया जाता है।
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