शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पहुंचे हाईकोर्ट, गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका की दाखिल

Sandesh Wahak Digital Desk: नाबालिगों के यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। दोनों की ओर से अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है।

पॉक्सो एक्ट के तहत FIR

शंकराचार्य के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में एक जाने-माने धर्मगुरु के शिष्य द्वारा नाबालिगों के संरक्षक के रूप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इस FIR में पॉक्सो (POCSO) एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी की संभावनाएं प्रबल हो गई थीं।

हाईकोर्ट में दी गई दलीलें

शंकराचार्य के अधिवक्ताओं (राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्रीप्रकाश) ने मंगलवार को अग्रिम जमानत याचिका की प्रति शासकीय अधिवक्ता कार्यालय को सौंप दी। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि शंकराचार्य पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक विद्वेष के चलते इस ‘घृणित’ मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष का तर्क है कि इस मुकदमे का एकमात्र उद्देश्य शंकराचार्य की सामाजिक और धार्मिक छवि को धूमिल करना है। उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह पुलिस की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जानी चाहिए।

अगली प्रक्रिया

याचिका अब हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल होने के बाद ‘रिपोर्टिंग’ की प्रक्रिया से गुजरेगी। तकनीकी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद, इस मामले को सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध (List) किया जाएगा।

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