स्वामी जितेंद्रानंद का अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ा हमला, बोले- वे कभी शंकराचार्य थे ही नहीं

Prayagraj News: प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद अब संतों के बीच शंकराचार्य की पदवी को लेकर जंग छिड़ गई है। काशी के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर तीखा हमला बोलते हुए उनके दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद कभी शंकराचार्य नहीं थे और वे केवल नकारात्मक प्रचार के जरिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बातचीत में दावा किया कि अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु, दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाने से साफ मना कर दिया था। उन्होंने कहा, अविमुक्तेश्वरानंद 2020 में एक पुरानी वसीयत लेकर आए थे, जबकि उनके गुरु ने जीते-जी उन्हें उत्तराधिकारी मानने या कोई वसीयत लिखने से इनकार किया था।

स्वामी जितेंद्रानंद के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद ने परंपराओं को ताक पर रखकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का जिक्र करते हुए स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के शपथपत्र (Affidavit) की वजह से अविमुक्तेश्वरानंद के पट्टाभिषेक पर रोक लगी हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गुरु की 13वीं के समय दूर से जल छिड़क देने को अभिषेक कहना गलत बयानबाजी है। शास्त्रसम्मत अभिषेक तो सिंहासन पर बैठाकर किया जाता है।

किसी अखाड़े या संत ने नहीं दी मान्यता

जितेंद्रानंद सरस्वती ने सवाल उठाया कि आखिर देश के किस अखाड़े, संन्यासी या प्रतिष्ठित संत ने उन्हें शंकराचार्य माना है? उन्होंने दावा किया कि किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन में उन्हें शंकराचार्य के तौर पर आमंत्रित नहीं किया जाता।

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