स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा पर वार, बोले- ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’ वाली राजनीति कर रही सरकार

Sandesh Wahak Digital Desk: पूर्व कैबिनेट मंत्री और दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ पिछड़ों और दलितों के हित की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ कानूनी मोर्चे पर उन्हें अकेला छोड़ देती है।

‘अदालत में सरकार गायब क्यों थी?’

स्वामी प्रसाद मौर्य ने एससी, एसटी और ओबीसी हितों से जुड़े कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में इन मुद्दों पर बेहद कमजोर दिखी। उन्होंने पूछा अगर सरकार की नीयत साफ थी, तो अदालत में मजबूती से पक्ष क्यों नहीं रखा गया? इतने महत्वपूर्ण कानून की पैरवी के लिए बड़े और सीनियर वकीलों को क्यों नहीं उतारा गया? क्या सरकार ने जानबूझकर कमजोर पैरवी कराई ताकि कानून पर रोक लग जाए और सरकार की जिम्मेदारी भी न बने?

सामाजिक न्याय पर उठाए सवाल

यूनिवर्सिटी और सरकारी संस्थानों में हो रही भर्तियों का मुद्दा उठाते हुए मौर्य ने कहा कि आज 90 से 95 फीसदी भर्तियां केवल सामान्य वर्ग (General) की हो रही हैं। ऐसे में पिछड़ों और दलितों के सामाजिक न्याय की बात करना बेमानी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीति ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’ वाली है, यानी वह पिछड़ों का हक भी मारना चाहती है और अपनी छवि भी बचाना चाहती है।

‘वोट बैंक के लिए समुदायों को भिड़ा रही भाजपा’

मौर्य ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर एससी, एसटी, ओबीसी और सर्वसमाज को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा कर रही है। उनका मानना है कि समुदायों के बीच टकराव पैदा कर भाजपा अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करना चाहती है, जिससे भाईचारा खत्म हो रहा है।

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