Heart Attack का लक्षण हो सकती है पैरों की सूजन

Sandesh Wahak Digital Desk: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। इस दौरान हार्ट अटैक (Heart Attack) के मामलों में इजाफा देखा जाता है। आमतौर पर लोग हार्ट अटैक (Heart Attack) के लक्षणों को केवल छाती के दर्द तक सीमित मानते हैं, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। दरअसल, पैरों की नसों का भी सीधे तौर पर दिल से गहरा संबंध होता है। अगर पैरों की नसों में किसी तरह की खराबी या ब्लॉकेज हो जाए, तो इससे हार्ट अटैक या दिल का दौरा पड़ने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में पेरिफरल आर्टरी डिजीज कहा जाता है।

क्या है पेरिफरल आर्टरी डिजीज

पेरिफरल आर्टरी डिजीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें पैरों की नसों में सूजन आ जाती है। यह सूजन नसों में कोलेस्ट्रॉल जमने की वजह से होती है। जब नसों में सूजन आती है, तो वहां ब्लॉकेज बनने लगता है और पैरों तक खून का फ्लो सही तरीके से नहीं पहुंच पाता है। यह समस्या केवल पैरों तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर की दूसरी आर्टरी में भी ब्लॉकेज की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी अचानक नहीं होती, बल्कि इसके संकेत काफी पहले से शरीर में दिखने लगते हैं।

पेरिफरल आर्टरी डिजीज के दौरान शरीर कुछ ऐसे संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सीढ़ी चढ़ते समय पैरों में दर्द या ऐंठन महसूस होना, पैरों, टखनों या पंजों में सूजन आना, पैरों में ठंडक लगना, पैरों का रंग नीला या हल्का बैंगनी होना, पैरों का सुन्न हो जाना, त्वचा का सूखा और खुरदुरा होना तथा नाखूनों का मोटा और पीला हो जाना इस बीमारी के प्रमुख संकेत माने जाते हैं।

नसों का ब्लॉकेज और Heart Attack

दिल्ली के राजीव गांधी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. अजीत जैन के अनुसार पेरिफरल आर्टरी डिजीज में पैरों की नसों में बना ब्लॉकेज या क्लॉट हार्ट को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मरीजों में हार्ट अटैक (Heart Attack) के मामले भी सामने आते हैं। मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में इस बीमारी का जोखिम ज्यादा होता है। हालांकि हर मामले में यह बीमारी सीधे दिल को नुकसान नहीं पहुंचाती, लेकिन यह हार्ट अटैक के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर जरूर बनती है। ऐसे में पैरों में सूजन, सुन्नपन या असहजता को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है, खासतौर पर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से दिल की बीमारी रही हो।

बचाव के लिए क्या करना जरूरी

इस बीमारी से बचाव के लिए अपनी दिनचर्या में बदलाव करना बेहद जरूरी है। नियमित रूप से एक्सरसाइज करना, खानपान का विशेष ध्यान रखना, अधिक फैट, मैदा और रेड मीट से परहेज करना और मानसिक तनाव से दूर रहना पेरिफरल आर्टरी डिजीज और हार्ट अटैक दोनों के खतरे को कम करने में मदद करता है। सही समय पर लक्षणों को पहचानकर डॉक्टर से सलाह लेने से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।

 

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