शिक्षक भर्ती घोटाला : बलरामपुर में निकले सबसे ज्यादा फर्जी शिक्षक, 17 लोगों पर मुकदमा
Sandesh Wahak Digital Desk: कहते हैं शिक्षक समाज का निर्माण करते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में गाहे बगाहे शिक्षक भर्ती में घोटाले अक्सर सामने आते रहते हैं। कभी बेसिक शिक्षा विभाग इस काम के लिए बदनाम हुआ करता था। अब बलरामपुर जिले में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में फर्जी पैनल के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति का मामला गर्म हो गया है।

इस घोटाले में कई बड़े नाम शामिल
इस घोटाले में पूर्व सपा दर्जा प्राप्त मंत्री सलिल सिंह उर्फ टीटू और जिला गन्ना अधिकारी रंजीत सिंह कुशवाहा सहित कई बड़े नाम सामने आए हैं। सतर्कता अधिष्ठान प्रयागराज सेक्टर की जांच में खुलासे के बाद 23 सितंबर को इंस्पेक्टर हवलदार सिंह यादव की ओर से एफआईआर दर्ज की गई है। जिनमें बलरामपुर जिले के सात इंटर कॉलेजों के प्रबंधक और प्राचार्य शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के इंटर कॉलेजों के प्रबंधकों और प्राचार्यों के नाम शामिल हैं।

एफआईआर के अनुसार, इस मामले में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पूर्व उपसचिव नवल किशोर, तीन जिला विद्यालय निरीक्षकों समेत कुल 48 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि फर्जी पैनल तैयार कर शिक्षकों की नियुक्ति की गई और वेतन के नाम पर लाखों रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इनके जॉइनिंग के समय तथ्यों की सही ढंग से जांच तक नहीं की गई। ना ही इन शिक्षकों का सत्यापन ही करवाया गया।
बलरामपुर के 17 आरोपियों पर मुकदमें दर्ज
दर्ज मुकदमे में शामिल 48 आरोपियों में से 17 बलरामपुर जनपद से जुड़े हैं। इनमें उतरौला के भारतीय इंटर कॉलेज की प्रबंधक विमला त्रिपाठी और प्रधानाचार्य कुमेश कुमार सरोज, रेहरा बाजार बीपीएस इंटर कॉलेज के प्रबंधक नित्यानंद शुक्ला और प्रधानाचार्य ओम प्रकाश, डीएवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक संजय तिवारी और प्रधानाचार्य हरि प्रकाश वर्मा, तुलसीपुर के स्वतंत्र भारत इंटर कॉलेज के प्रबंधक रंजीत कुमार कुशवाहा व प्रधानाचार्य राधेश्याम पांडेय, एमपीपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य गुरु प्रसाद तिवारी व दो शिक्षक, मथुरा बाजार के रामशंकर भारती इंटर कॉलेज के प्रबंधक अतुल कुमार सिंह और प्रधानाचार्य मनीराम तिवारी, पचपेड़वा के लोकमान्य तिलक इंटर कॉलेज के प्रबंधक शकील अहमद और प्रधानाचार्य राजेश कुमार सिंह, तुलसीपुर बसंत लाल इंटर कॉलेज के प्रबंधक पूर्व मंत्री सलिल सिंह टीटू और प्रधानाचार्य अशोक पांडेय प्रमुख हैं।
इनके अलावा निवर्तमान जिला गन्ना अधिकारी रंजीत सिंह कुशवाहा और अन्य शिक्षकों-कर्मचारियों पर भी केस दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले के सामने आने से शिक्षा विभाग के साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।
2023 में दायर हुई थी याचिका
इस मामले में अभियोग भी तब पंजीकृत हुआ जब अमित कुमार श्रीवास्तव और शिल्पी केसरी की ओर से हाईकोर्ट में 2023 में दायर याचिका के बाद हुआ था। हाईकोर्ट के 29 मई 2023 के आदेश पर 13 अक्तूबर को अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। एफआईआर के मुताबिक किसी भी चयनित शिक्षक का पैनल सबसे पहले चयन बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करने के बाद संबंधित जिले के डीआईओएस कार्यालय को भेजा जाता है।
बताया जाता है कि पैनल का सत्यापन करते हुए कार्यभार ग्रहण कराने की जिम्मेदारी संबंधित डीआईओएस की होती है। अभ्यर्थियों विवेक कुमार शुक्ला को विज्ञापन संख्या 2021 के आधार पर प्रशिक्षित स्नातक विज्ञान, राजकुमार को विज्ञापन संख्या 2016 में प्रशिक्षित स्नातक हिंदी और विकास तिवारी को फर्जी अभिलेखों के आधार पर चयनित दिखाते हुए मुजफ्फरनगर के बरला इंटर कॉलेज में नियुक्ति दे दी गई। बाद में चयन बोर्ड से सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई तो पता चला कि पैनल ही फर्जी है।
कई लोगों की सांठ-गांठ आई सामने
इसमें डीआईओएस गजेन्द्र कुमार और पटल सहायक प्रमोद कुमार शर्मा की सांठ-गांठ सामने आई है। इसी प्रकार बलरामपुर जिले डीआईओएस गोविन्द राम और मनोज कुमार आर्य, पटल सहायक पवन लाल, अरविंद कुमार यादव, अंकित श्रीवास्तव एवं राजबली यादव भी मिलीभगत के दोषी मिले हैं। चयन बोर्ड के पूर्व उपसचिव नवल किशोर के खिलाफ पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और समय से सत्यापन आख्या नहीं भेजने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।
सबसे ज़्यादा प्रभावित बलरामपुर जिले में इस मामले पर किसी ने भी कुछ भी बोलने से इनकार किया है। जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत है, वह लोग कहीं ना कहीं बचते हुए नजर आ रहे हैं। जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक मृदुला आनंद ने ने भी इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार किया है। अब देखना होगा की सतर्कता अधिष्ठान प्रयागराज और जिला प्रशासन मिलकर इस मामले में क्या-क्या कार्रवाई करता है? फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखने में यही लग रहा है कि जिन लोगों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत हुआ है, उन लोगों के मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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