कुशीनगर में शिक्षकों का प्रदर्शन, BSA दफ्तर से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली, TET से छूट देने की मांग
Sandesh Wahak Digital Desk: कुशीनगर जनपद के हजारों शिक्षकों ने आज अपनी सेवा और सम्मान की रक्षा के लिए हुंकार भरी। ‘टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के बैनर तले एकजुट हुए शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय पर घंटों धरना दिया और फिर जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

क्या है विवाद की जड़?
शिक्षकों की नाराजगी का मुख्य कारण 1 सितंबर 2025 को आया सुप्रीम कोर्ट का वह निर्णय है, जिसमें देश भर के उन शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी गई है जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे।
उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 27 जुलाई 2011 को लागू हुआ था। इसके बाद नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए ही TET अनिवार्य होनी चाहिए।
शिक्षकों का कहना है कि जो शिक्षक दशकों से पढ़ा रहे हैं और पदोन्नति के हकदार हैं, उन पर अब परीक्षा थोपना सरासर अन्याय है।

धरने को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह और प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संयोजक राजकुमार सिंह ने कहा कि इस फैसले से देशभर के लाखों शिक्षक आहत हैं। उन्होंने मांग की है कि भारत सरकार को तुरंत एक अध्यादेश (Ordinance) लाना चाहिए, ताकि 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से स्थायी रूप से मुक्त रखा जा सके।

नारी शक्ति और एकजुटता का प्रदर्शन
आंदोलन की खास बात यह रही कि इसमें महिला शिक्षिकाओं ने भी भारी संख्या में हिस्सा लिया। BSA दफ्तर में घंटों नारेबाजी करने के बाद शिक्षकों का हुजूम कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पर भी असर दिखा। शिक्षकों ने साफ कर दिया कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो यह आंदोलन दिल्ली तक जाएगा।
इस दौरान जिला महामंत्री उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ छेदी प्रसाद, जिला मंत्री कुंजेश्वर सिंह, संजीव कुमार, इंद्रजीत मणि त्रिपाठी, अनूप सिंह, दिनेश सिंह, मोलही प्रसाद प्रजापति, डा व्यास सिंह, अमरजीत शुक्ल, ऋषिकेश सिंह, राकेश पांडेय, राकेश यादव, अजिताभ तिवारी, अनुपम, लक्ष्मी श्री, रेनूबाला सिंह समेत हजारों शिक्षक व शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।
Also Read: PDA दिवस पर अखिलेश का सियासी वार, बोले- ‘जरूरी नहीं कि कलम जिसकी हो, लफ्ज भी उसी के हों’

