पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक का विरोध प्रदर्शन हुआ हिंसक, शहबाज़ शरीफ और आर्मी चीफ मुनीर की कुर्सी पर संकट
Sandesh Wahak Digital Desk: पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) द्वारा चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों ने शनिवार को हिंसा और आगजनी का रूप ले लिया, जिससे देश के प्रमुख शहरों में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। ईशनिंदा कानून और धार्मिक संवेदनशीलता के मुद्दों पर सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें जारी हैं।
पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हिंसा में कई प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं, जबकि दर्ज़नों लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने लाहौर, इस्लामाबाद और कराची जैसे बड़े शहरों में सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है। TLP समर्थकों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के ख़िलाफ़ जमकर हिंसा की।
लाहौर और कराची में सरकारी वाहनों, दुकानों और बैंकों में आग लगा दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने बेरिकेड्स लगाकर पुलिस को खदेड़ा और वाहनों को जलाया। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, अब तक कम से कम 30 लोगों के मारे जाने और 100 से अधिक लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे राष्ट्रीय संकट घोषित करते हुए अस्पतालों में आपातकालीन स्थिति लागू कर दी है।
प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ की कुर्सी डगमगाई
इन हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिरता को गहरे संकट में डाल दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर के ख़िलाफ़ लोगों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार जल्द स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाई, तो यह पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा फेरबदल कर सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहबाज़ शरीफ़ और जनरल मुनीर दोनों की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
सेना की तैनाती और कर्फ्यू
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान की पुलिस और सेना बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही है। कई इलाकों में सेना को तैनात किया गया है और शहरों में कर्फ्यू लगाने की खबरें भी आ रही हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा सेना के ख़िलाफ़ भी नारेबाजी शुरू हो जाने से स्थिति और भी जटिल हो गई है।
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