टेंडर फर्जीवाड़ा: अधर में जांच, नियुक्ति विभाग के सवालों पर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी
Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: यूपी में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच लटकाने की परम्परा पुरानी है। इस बार मामला प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सेवा प्रदाता के चयन का है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दखल पर अफसरों ने टेंडर भले निरस्त कर दिया।

लेकिन सीवीसी-डीओपीटी के पत्र पर नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने यूपी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन के एमडी जगदीश, जीएम उपकरण उज्जवल कुमार के खिलाफ मामले में जांच शुरू कर दी है। टेंडर फर्जीवाड़े में घिरता देख स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्ति विभाग के सवालों पर चुप्पी साध ली है। महीनों बाद भी जांच अधर में है जबकि सीधे पीएमओ से प्रकरण को सीवीसी भेजा गया था।

टेंडर में कंपनियों ने गुटबाजी करके पांच गुना कीमतें रखते हुए 300 करोड़ से ज्यादा कमाई की साजिश रची थी। फर्में निजी अस्पतालों में सस्ते में इसी काम को कर रही हैं। ‘संदेश वाहक’ ने 25 जुलाई 2024 को प्रकरण का खुलासा ‘बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट में 300 करोड़ डकारने की तैयारी पर सीवीसी का शिकंजा’ शीर्षक से किया था। नियुक्ति विभाग ने आठ अक्टूबर 2024 को स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर दो दिन में टेंडर से जुड़े सवालों के जवाब मांगे थे। पिछले वर्ष 27 अगस्त, अनुस्मारक चार सितंबर, 18 सितंबर के जरिये नियुक्ति विभाग ने पत्र भेजे। फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट नहीं सौंपी।

कई पत्र भेजे, नहीं मिली नियुक्ति विभाग की आख्या
इसके बाद नियुक्ति विभाग के विशेष सचिव विजय कुमार ने 14 नवंबर 2024 को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा को चार पत्रों के बावजूद रिपोर्ट नहीं भेजने का पत्र लिखा। साथ में 19 नवंबर 2024 को नियुक्ति विभाग में बैठक बुलाई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग और कार्पोरेशन के दो अफसर शामिल हुए। विशेष सचिव नियुक्ति विजय कुमार अफसरों के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने पांच सवालों के जवाब और मांगे। जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने दो दिसंबर 2024 को मेडिकल कार्पोरेशन के एमडी जगदीश को पत्र भेजते हुए नियुक्ति विभाग के कार्यवृत्त दिनांक 25.11.2024 के क्रम में टेंडर से जुडी सूचनाएं मांगी।

पत्र के मुताबिक नियुक्ति विभाग ने कहा कि टेंडर की टेक्निकल बिड 31 जुलाई 2023 को खोली गयी। फाइनेंशियल बिड तीन से चार माह बाद 5 दिसंबर 2023 को क्यों खोली गयी। टेंडर निरस्त (9 जुलाई 2024) किये जाने में इतना लंबा समय किन कारणों से लगा। टेंडर निरस्त होने के बाद पहले से कार्यरत फर्म का विस्तार करके कार्य करवाया गया या किसी अन्य माध्यम से कार्य हुआ। दो माह बीतने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्ति विभाग को वांछित सूचनाएं नहीं भेजी हैं। इसका सीधा अर्थ है कि बड़े अफसरों को बचाने की नीयत से जांच को फाइलों में कैद कराने के उच्चस्तरीय प्रयास हो रहे हैं।
बेहद गोपनीय मामला है। इसे प्रेस को नहीं बताया जा सकता है।
-जगदीश, एमडी, यूपी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन
अभी प्रकरण की जानकारी नहीं है। पता करके ही बता पाऊंगा।
-एम देवराज, प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक)
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