विदेशी नागरिकों के जरिए चल रहा था आतंकी नेटवर्क, म्यांमार में होती थी ट्रेनिंग, NIA का खुलासा
Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)द्वारा गिरफ्तार किए गए एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों के सोशल मीडिया अकाउंट से कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि म्यांमार के ट्रेनिंग कैंपों में ‘अल्लाह हू अकबर’ जैसे नारे लगाए जा रहे थे और वहां लोगों को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग दी जा रही थी। इस पूरे नेटवर्क को तुर्की की एक एजेंसी का समर्थन मिलने की भी बात सामने आई है।
ISI की सक्रियता
सूत्रों के मुताबिक, ISI एक बार फिर भारत विरोधी अभियान को तेज कर रही है और अपने गुप्त ऑपरेशनों को विस्तार दे रही है। इसके तहत विभिन्न देशों में डेस्क बनाकर आतंकी मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही खुफिया जानकारी जुटाने और स्थानीय एजेंसियों में घुसपैठ की कोशिशें भी जारी हैं। गिरफ्तार किए गए इन सात विदेशी नागरिकों के मोबाइल फोन डेटा को जांच के लिए भेजा गया है, जिससे इस साजिश के और बड़े पहलुओं का खुलासा हो सके।
तुर्की एजेंसी का था समर्थन
सूत्रों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क को तुर्की की NIO एजेंसी का समर्थन प्राप्त है। यह वही तरीका है जिसे पहले श्रीलंका में भी अपनाया गया था। उस समय भी इसी तरह का नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसे बाद में भारतीय एजेंसियों ने उजागर किया था।
कई देशों में फैलाया जा रहा नेटवर्क
मिली जानकारी के अनुसार बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, रूस और श्रीलंका में ऐसे नेटवर्क या तो पहले से सक्रिय हैं या उन्हें तैयार किया जा रहा है। खास तौर पर बांग्लादेश के ढाका डेस्क के जरिए HuJI और जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश जैसे संगठनों से जुड़े लोगों को भारत के खिलाफ आतंकी ट्रेनिंग दी जा रही है। इन लोगों को भारत में घुसपैठ के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसमें नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल को मुख्य निशाना बनाया गया है।
विदेशी दौरों ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
म्यांमार में बढ़ती अस्थिरता के बीच बांग्लादेश के सैन्य ठिकानों पर विदेशी नागरिकों के लगातार और असामान्य दौरे ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। 10 से 18 जनवरी के बीच 5 विदेशी नागरिकों, जिनमें चार अमेरिकी और एक कनाडाई शामिल थे, ने बांग्लादेश सेना के कई कैंटोनमेंट्स का दौरा किया। इनमें कॉक्स बाजार के रामू स्थित 10वीं इन्फैंट्री डिवीजन मुख्यालय भी शामिल है, जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार यह समूह वर्जीनिया स्थित एक संगठन से जुड़ा हुआ था और उन्हें बांग्लादेश सेना द्वारा कुरमिटोला गोल्फ क्लब में ठहराया गया था, जिसे असामान्य माना जा रहा है। रामू का क्षेत्र बांग्लादेश-म्यांमार सीमा और म्यांमार के रखाइन प्रांत के संवेदनशील इलाकों के बेहद करीब स्थित है।
समुद्री रास्तों से हथियार आपूर्ति की आशंका
खुफिया जानकारी के अनुसार म्यांमार की सैन्य सरकार और बांग्लादेश से जुड़े कुछ तत्वों के बीच एक गुप्त तालमेल बन रहा है। इसके तहत मिजोरम सीमा के पास अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे प्रयास का उद्देश्य चट्टोग्राम के पास एक जिहादी ठिकाना तैयार करना हो सकता है।
साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि आईएसआई समुद्री रास्तों के जरिए हथियारों की आपूर्ति की योजना बना रही है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और नेटवर्क के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं। आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस नेटवर्क की गंभीरता को और उजागर कर सकते हैं।
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