‘सालों संसद में आवाज उठाई, अब प्रशासन मेरा वजूद पूछ रहा है’, SIR नोटिस पर बिफरे दानिश अली
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की आंच अब बड़े नेताओं तक पहुंचने लगी है। अमरोहा से पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजकर उनके दस्तावेजों की जांच के लिए तलब किया है। दानिश अली ने इस कदम को भाजपा की ‘प्रशासनिक दहशतगर्दी’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है।
सोशल मीडिया पर झलका दर्द और गुस्सा
दानिश अली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर नोटिस की कॉपी साझा करते हुए लिखा, “ये कागज देख रहे हैं आप? सालों आपकी सेवा की, संसद में आवाज उठाई और आज प्रशासन मुझसे मेरा वजूद पूछ रहा है। अगर एक पूर्व सांसद के साथ SIR के नाम पर ये हो सकता है, तो गरीब किसान और मजदूर का क्या होगा?” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भाजपा हार के डर से जनता का वोट छीनने की तैयारी कर रही है और प्रशासन के जरिए विपक्ष को डराया जा रहा है।
नोटिस में क्या है विसंगति?
अमरोहा के सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा जारी इस नोटिस में दो मुख्य बातें कही गई हैं। मतदाता सूची की जांच में दानिश अली के पिता के नाम में तकनीकी विसंगति (Mismatch) पाई गई है। नोटिस के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि पुनरीक्षण के दौरान उनका नाम पुरानी नामावली से गलत ढंग से लिंक हो गया है।
प्रशासन ने उन्हें 24 फरवरी (दोपहर 12:00 से 2:30 बजे के बीच) निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मूल दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा है, ताकि मतदाता सूची में उनका नाम बरकरार रखा जा सके।
UP में SIR अभियान की मौजूदा स्थिति
निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर यह अभियान चला रहा है। प्रदेश भर में अब तक 1.66 करोड़ से अधिक ‘नो मैपिंग’ और तार्किक विसंगतियों के नोटिसों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि 50 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है और रविवार को भी विशेष अभियान चलाकर बूथों पर सुनवाई की गई।
जहां प्रशासन इसे एक सामान्य प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विपक्षी नेता इसे मतदाताओं को परेशान करने और खास तौर पर विरोधी खेमे के वोट काटने की साजिश बता रहे हैं।
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