12 वर्षों में बदली राज्यसभा की तस्वीर, 100 करोड़ी सांसदों की संख्या 4 से बढ़कर 31 हुई

Sandesh Wahak Digital Desk: राज्यसभा को संसद का उच्च सदन कहा जाता है, लेकिन पिछले करीब 12 साल में यहां पहुंचने वाले सांसदों की आर्थिक तस्वीर तेजी से बदली है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के अलग-अलग साल के आंकड़ों में ₹100 करोड़ से ज्यादा घोषित संपत्ति वाले सांसदों की संख्या बढ़ती दिखती है। 2014 में ऐसे 4 सांसद थे, 2018 में संख्या 6 हुई, 2024 में 31 और जून 2026 में भी यह आंकड़ा 31 है। आंकड़े चुनावी हलफनामों में घोषित संपत्ति पर आधारित हैं।

2026 में हर 7वां सांसद 100 करोड़ क्लब में

ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच की जून 2026 की रिपोर्ट में राज्यसभा के 233 में से 226 वर्तमान सांसदों का एनालिसिस किया गया। पश्चिम बंगाल की 4 सीटें खाली थीं और 3 सांसदों (देवेंद्र प्रताप सिंह, जीसी चंद्रशेखर, एस. सेल्वगणपति) के एफिडेविट उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका एनालिसिस नहीं हो सका। रिपोर्ट के मुताबिक, 226 में से 31 सांसद यानी 14% ऐसे हैं, जिनकी संपत्ति ₹100 करोड़ से ज्यादा की है। यानी करीब हर सातवां सांसद इस श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं, सभी 226 सांसदों की औसत घोषित संपत्ति ₹115.25 करोड़ है। यह औसत बताता है कि राज्यसभा की आर्थिक प्रोफाइल कितनी ऊंची है, हालांकि औसत पर कुछ बेहद ज्यादा संपत्ति वाले सांसदों का बड़ा असर पड़ता है।

31 में सबसे ज्यादा कौन

दलवार आंकड़ों में BJP के 107 सांसदों में 7 यानी 7% ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति घोषित की है। कांग्रेस के 29 में 6 यानी 21% सांसद इस श्रेणी में हैं। YSRCP के 4 में 2 (50%), TDP के 4 में 2 (50%), BRS के 3 में 2 (67%) और NCP के 4 में 2 (50%) सांसदों की घोषित संपत्ति 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा 4 निर्दलीय सांसदों (100%) के पास भी 100 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति है।

सबसे अमीर सांसद के पास 5,300 करोड़ रुपये से ज्यादा

2026 के आंकड़ों में BRS के तेलंगाना सांसद डॉ. बंदी पार्थ सारथी रेड्डी सबसे ज्यादा घोषित संपत्ति वाले सांसद हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 5,300 करोड़ रुपये है। इसके बाद पंजाब से BJP के राजिंदर गुप्ता (पहले AAP में) की संपत्ति करीब 5,053 करोड़ रुपये और तेलंगाना से कांग्रेस के डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी की संपत्ति करीब 2,558 करोड़ रुपये है। चौथे स्थान पर सपा की जया अमिताभ बच्चन (1,578 करोड़ रुपये) और पांचवें स्थान पर झारखंड से निर्दलीय सांसद नथवाणी परिमल (755 करोड़ रुपये) हैं। वहीं निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल 608 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सातवें स्थान पर हैं।

राज्यवार आंकड़े भी दिलचस्प हैं। तेलंगाना के 7 में से 4 सांसद यानी 57% और आंध्र प्रदेश के 11 में से 5 यानी 45% सांसदों ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति घोषित की है। ओडिशा में 10 में से 3 (30%), पंजाब में 7 में से 2 (29%) और गुजरात में 11 में से 2 (18%) सांसद इस श्रेणी में हैं। उत्तर प्रदेश के 31 में से 4 (13%), महाराष्ट्र के 19 में से 3 (16%) और तमिलनाडु के 18 में से 2 (11%) सांसदों की संपत्ति 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड में 1-1 सांसद 100 करोड़ रुपये क्लब में शामिल हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के 18 सांसदों की कुल घोषित संपत्ति करीब 10,259 करोड़ रुपये है (तेलंगाना: 8,310 करोड़ + आंध्र प्रदेश: 1,949 करोड़), जो 226 सांसदों की कुल करीब 26,047 करोड़ रुपये संपत्ति का लगभग 39% बैठती है।

2026 में औसत घोषित संपत्ति 115.25 करोड़ रुपये हो गई है। ADR के आंकड़ों के हिसाब से राज्यसभा सांसदों की औसत घोषित संपत्ति 2018 (55.62 करोड़ रुपये) के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा स्तर पर पहुंच चुकी है। वहीं 100 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति वाले सांसदों की संख्या भी बढ़कर 31 तक पहुंच गई है। इस तस्वीर का मतलब यह नहीं है कि पैसा ही राज्यसभा पहुंचने की एकमात्र वजह है। सांसदों की संपत्ति अलग-अलग कारोबारी, पेशेवर और पारिवारिक पृष्ठभूमि से आती है, लेकिन आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि राज्यसभा की मौजूदा सदस्यता में बहुत ज्यादा संपत्ति वाले लोगों की मौजूदगी अहम पैटर्न बन चुकी है।

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