फखरुल उलूम मदरसे में विवाद गहराया: प्रबंधक पक्ष बोला – रजिस्ट्रार को नहीं है हस्तक्षेप का अधिकार
Sandesh Wahak Digital Desk: बलरामपुर जनपद के चर्चित फखरुल उलूम मदरसे में प्रबंधन और प्रधानाचार्य के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। मदरसे के प्रबंधक नुरुल हक़ खान के पुत्र और मदरसा सोसाइटी के जनरल बॉडी के सदस्य शोएब खान ने दावा किया है कि प्रधानाचार्य अब्दुल वहाब को निलंबित किया गया है और यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुसार की गई है।

‘रजिस्ट्रार को नहीं है अधिकार’, फखरुल उलूम प्रबंधन का बयान
वहीं, उन्होंने रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (डीएमओ) के आदेशों को “अधिकार क्षेत्र से बाहर” बताया है। उन्होंने कहा कि एक बार रजिस्ट्रार और डीएमडब्लूओ के ही आदेश पर इन्हें निलंबित भी किया गया था और नियम संगत रूप से इस मामले में जांच के बाद कार्रवाई की गई थी। अब बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिना किसी नोटिस या हमारी जानकारी या हमारा पक्ष लिए एक पक्षीय आदेश पारित रही हैं। जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह मामले में कई आदेश दे रखे हैं।
प्रबंधन बोला- हमारा चुनाव 2026 तक वैध
शोएब खान ने बताया, “हमारे पिताजी नूरुल हक़ खान 2007 से मदरसा फखरुल उलूम के मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और अभी जिस सोसाइटी से यह मदरसा संचालित होता है, वह 2021 में निर्वाचित प्रबंधन समिति 2026 तक वैध है। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार रजिस्ट्रार या डीएमडब्लूओ को हमारे मैनेजमेंट में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही यही बात उत्तर प्रदेश मदरसा अधिनियम 2016 भी कहता है।”
शोएब खान ने कहा कि प्रधानाचार्य अब्दुल वहाब पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं और वे कई बार निलंबित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि “21 मार्च 2025 को रजिस्ट्रार के निर्देश पर, डीएमडब्लूओ के मार्गदर्शन में इंक्रीमेंट से संबंधित मामलों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। नोटिस देने के बावजूद प्राचार्य ने जवाब नहीं दिया, जिसके बाद नियमानुसार निलंबन की कार्रवाई की गई थी, तभी से वह निलंबित है।”

प्रबंधन पक्ष के अनुसार, कार्यवाहक प्रधानाचार्य सादिक हुसैन द्वारा हाल ही में अवगत कराया गया कि रजिस्ट्रार द्वारा मुकदमा दर्ज कराने और मदरसे की मान्यता निरस्त करने का निर्देश जारी हुआ है। इस पर प्रबंधन ने आपत्ति जताई है और कहा कि “रजिस्ट्रार को ऐसा आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।”
प्रबंधक पक्ष ने रजिस्ट्रार के आदेशों पर उठाए सवाल
जब उनसे पूछा गया कि क्या रजिस्ट्रार का आदेश प्रबंधन को भेजा गया, तो उन्होंने कहा, “न हमें आदेश की कोई कॉपी मिली, न कोई सूचना दी गई। केवल कार्यवाहक प्राचार्य से जानकारी मिली। जबकि हमारी सोसाइटी और प्रबंधक का पक्ष लेना या उनकी बात को सुनना भी आवश्यक है। यह बातें नियमावली और न्यायपालिका के आदेशों के खिलाफ हैं।”
अपने प्रबंधक पिता की बीमारी से जूझ रहे शोयब खान ने यह भी स्पष्ट किया कि मदरसे के वेतन आहरण से जुड़ी धारा 12(5) केवल वेतन भुगतान के लिए होती है, न कि प्रबंधन को भंग करने के लिए। यही कार्रवाई की गई है। जिसके लिए हमने अपील कर रखी है। उन्होंने बताया, “हमारा चुनाव 2021 में हुआ था, जो 2026 तक वैध है। किसी भी न्यायालय या अधिकारी ने उसे निरस्त नहीं किया है।”
पद के दुरुपयोग का भी लगा आरोप
सदस्य ने आरोप लगाया कि सस्पेंडेड प्राचार्य अब्दुल वहाब 2018 से “मदरसे में विवाद का वातावरण बना रहे हैं” और अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने जब सुधार की कोशिश की, तो वही बौखला गए। पहले मदरसे में गंदगी और अनुशासनहीनता थी। अब स्थिति में सुधार आया है।”
फिलहाल, प्रबंधन समिति ने इस पूरे मामले पर डीएमडब्लूओ को जवाब देने की तैयारी की है और कहा है कि आगे की कार्रवाई बैठक में सामूहिक निर्णय के बाद की जाएगी। वहीं, सस्पेंडेड प्राचार्य अब्दुल वहाब का कहना है कि “मदरसे की मैनेजमेंट समिति भंग हो चुकी है और निलंबन अवैध है।” इस पर प्रबंधन पक्ष ने चुनौती देते हुए कहा कि “अगर समिति भंग है तो आदेश दिखाया जाए।”
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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