यूपी में लेखपालों का ‘खेल’ खत्म, योगी सरकार के इस कदम से भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश को लेकर होने वाले विवादों और लेखपालों-कानूनगो की मनमानी पर योगी सरकार बड़ा अंकुश लगाने जा रही है। राजस्व परिषद अब पैमाइश के लिए पारंपरिक ‘जरीब’ (लोहे की चेन) के बजाय जीपीएस आधारित रोवर मशीन (Rover Machine) का उपयोग करेगी। इस नई तकनीक से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि पैमाइश में त्रुटि की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी।
रोवर तकनीक: क्यों और कैसे है यह खास?
राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार के अनुसार, रोवर मशीन सैटेलाइट और ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ के डेटा का उपयोग कर सीधे जमीन का सटीक मानचित्र तैयार करेगी। रोवर के माध्यम से किसी भी भूमि की पैमाइश 5 सेंटीमीटर तक की एक्यूरेसी के साथ संभव होगी। जिस पैमाइश में घंटों लगते थे, वह अब मात्र 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाएगी। अब पैमाइश के लिए गांव के पुराने सीमा स्तंभों (पत्थरों) को खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सैटेलाइट डेटा से सीधे पैमाइश शुरू हो सकेगी। एक रोवर मशीन की अनुमानित लागत ₹6 लाख से ₹7 लाख है।
हर तहसील में बनेगी ‘स्पेशल रोवर टीम’
इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार प्रदेश की तहसीलों के लिए 350 रोवर खरीदने जा रही है। प्रत्येक तहसील में एक विशेषज्ञ टीम गठित होगी, जिसमें शामिल होंगे।
एक नायब तहसीलदार (टीम प्रभारी)
दो कानूनगो
दो लेखपाल
भ्रष्टाचार पर प्रहार और विवादों का अंत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद राजस्व परिषद इस योजना के लिए SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार कर रहा है। गौरतलब है कि जमीन संबंधी 90% विवाद पैमाइश की गड़बड़ी के कारण होते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड होने से इन पर रोक लगेगी। इसके अलावा पैमाइश का डेटा सीधे पोर्टल पर अपडेट होगा। जिससे स्थानीय स्तर पर लेखपालों द्वारा तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने का मौका नहीं मिलेगा। पायलट प्रोजेक्ट के सफल परीक्षण के बाद, नए साल (2026) की शुरुआत में इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने की उम्मीद है।
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