ABVP छात्रों पर लाठीचार्ज का मामला गरमाया, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पुलिस को चेताया
Sandesh Wahak Digital Desk: बाराबंकी की श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। इस घटना से नाराज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पुलिस की कार्रवाई को ‘बर्बर’ बताते हुए चेतावनी दी है।

बुधवार को घायल छात्रों से मिलने के लिए केजीएमयू (KGMU) पहुंचे केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी शांति बनाए रखना है, न कि किसी का हाथ-पैर तोड़ना। उन्होंने कहा बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज करके किसी का हाथ-पैर तोड़ देना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह बहुत गलत हुआ है। उन्होंने बताया कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। डिप्टी सीएम मौर्य ने कहा कि एबीवीपी एक संस्कारिक संगठन है और उसके छात्र अपनी वैध मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ इस तरह का बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
सोमवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने एबीवीपी की अगुवाई में यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन किया था। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी में लॉ डिग्री की मान्यता नहीं है और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। जब छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से मान्यता का सबूत मांगा, तो दो छात्रों को निष्कासित कर दिया गया, जिससे प्रदर्शन और भड़क गया।

प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस को बुलाया, जिसने छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। जब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा, तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद, सीओ सिटी हर्षित चौहान को सस्पेंड कर दिया गया, और बाराबंकी एसपी ने नगर कोतवाली प्रभारी आरके राणा सहित गदिया चौकी के सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया।

घायल छात्र केजीएमयू में भर्ती
लाठीचार्ज में घायल हुए 9 छात्रों को बाराबंकी जिला अस्पताल से केजीएमयू के फेज-2 में शिफ्ट किया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मंगलवार रात को ही अस्पताल पहुंचकर छात्रों का हालचाल लिया था और डॉक्टरों को बेहतरीन इलाज करने के निर्देश दिए थे।
एबीवीपी अवध प्रांत के प्रदेश मंत्री पुष्पेंद्र बाजपेई ने बताया कि यूनिवर्सिटी छात्रों को झांसा देकर उनके भविष्य को बर्बाद कर रही है। सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार को जांच सौंपी है, जबकि अयोध्या कमिश्नर गौरव दयाल यूनिवर्सिटी में चल रहे लॉ कोर्स की वैधता की जांच करेंगे।

