लखनऊ में ‘लिटरेरी फेस्ट’ का जलवा, इत्र की खुशबू से लेकर नवाबी किस्सों तक जमी महफिल
Sandesh Wahak Digital Desk: नवाबों के शहर और गंगा-जमुनी तहजीब के केंद्र लखनऊ में ‘हेरिटेज ऑफ अवध’ संस्था द्वारा एक शानदार साहित्यिक उत्सव ‘लिटरेरी फेस्ट’ का आयोजन किया गया। अलीगंज में आयोजित इस फेस्ट में शहर के नामचीन साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और कला प्रेमियों ने शिरकत की और अवध की विरासत पर खुलकर चर्चा की।
इत्र के इतिहास से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का आगाज पूर्व पुलिस अधिकारी बी.पी. अशोक ने दीप जलाकर किया। फेस्ट की पहली कड़ी में ‘इज़हार संस’ के मालिक इमरान अब्बासी ने इत्र (Perfume) के सदियों पुराने इतिहास और उसे बनाने की बारीकियों पर रौशनी डाली। लोगों ने बड़े चाव से जाना कि कैसे कुदरती फूलों से अवध की यह खास खुशबू तैयार की जाती है। इसके बाद रियाज़ अल्वी ने ‘हेरिटेज’ पर अपना नोट पढ़ा और बताया कि अपनी विरासत को संजोना आज के दौर में क्यों जरूरी है।

उर्दू की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मकबूलियत
मशहूर उर्दू स्कॉलर डॉ. एहतेशाम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्दू की अहमियत पर चर्चा करते हुए एक दिलचस्प जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि विदेशों में उर्दू सीखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और उनके पास कई विदेशी छात्र सिर्फ इस जुबान की मिठास के कारण इसे सीखने आते हैं। वहीं, कांग्रेस नेता तारिक सिद्दीकी ने अवध के नवाबों के दौर और उनके शासनकाल के अनछुए पहलुओं को दर्शकों के सामने रखा।
बैतबाजी का रोमांच और ‘ठग्स ऑफ अवध’ की दास्तान
टीचर तबस्सुम और उनके ग्रुप ने पारंपरिक ‘बैतबाजी’ (शेरो-शायरी की प्रतियोगिता) का आयोजन किया, जिसमें दो टीमों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। इसके बाद पूर्व IRS शफीक मलिक और आयकर आयुक्त सुबूर उस्मानी ने ‘ठग्स ऑफ अवध’ किताब पर चर्चा की। सुबूर उस्मानी ने कुख्यात अपराधी ‘बहराम’ के जुल्मों के बारे में विस्तार से बताया, जिसे सुनकर लोग दंग रह गए।

कॉफी हाउस के किस्से और बॉलीवुड में लखनऊ का योगदान
लखनऊ की चर्चा हो और ‘इंडियन कॉफी हाउस’ का जिक्र न हो, यह मुमकिन नहीं। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर और कांग्रेस नेता अमीर हैदर ने कॉफी हाउस से जुड़े दिलचस्प किस्से सुनाए, जिससे पुरानी यादें ताजा हो गईं। वहीं, पूर्व जज बी.डी. नकवी ने दारा शिकोह के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के आखिरी सत्र में मशहूर डायरेक्टर रहमान खान, डॉ. जया श्रीवास्तव, राजेन्द्र नाथ और नवीन कोहली ‘सयानी’ ने फिल्म, थिएटर और अवधी भाषा पर चर्चा की। डॉ. जया ने भावुक होते हुए कहा कि लखनऊ की तहजीब ही वह वजह है जिसके कारण उन्होंने इस शहर को अपना घर बना लिया। अपनी जादुई आवाज के लिए मशहूर नवीन सयानी ने भी अपने खास अंदाज में अवध की खूबियां गिनाईं।
अंत में मुजतबा खान और तारिक खान ने आए हुए सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया और इस साहित्यिक सफर के सफल समापन की घोषणा की।
Also Read: राजा भैया बनाम भानवी सिंह: सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली हाईकोर्ट को सख्त निर्देश, डेडलाइन तय

