परिवहन निगम के लोग ही निगम में तैनात महिलाओं का कर रहे उत्पीड़न
Sandesh Wahak Digital Desk: यूपी परिवहन निगम की दिन-रात सेवा करने के दौरान अचानक मौत होने वाले कार्मिकों को 8 साल बीत जाने के बाद करीब 1165 मृतक आश्रितों को बहाली मिली।मृतक आश्रितों की भर्ती प्रक्रिया को प्रबंध निदेश मासूम अली सरवर ने संपन्न कराने का काम किया। महिलाओं ने अपने दायित्वों की बाघ-डोर संभाली ही थी। कि राजधानी लखनऊ के अवध डिपो में मृतक आश्रित महिला परिचालकों से छेड़छाड़ का मामला सामने आ गया।
8 साल बाद मिली नौकरी, लेकिन 45 दिन में ही छिन गई सुरक्षा की उम्मीद
मृतक आश्रित महिला को पद संभाले हुये महज़ 45 दिन भी पूरे नहीं हुए थे। ड्यूटी के दौरान अवध डिपो के संविदा चालक सलमान बेग के पर बस में छेड़खानी का आरोप लगाया। महिला परिचालक ने सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक को 2 जुलाई को शिकायती पत्र देते हुए न्याय की गुहार लगायी थी। महिला परिचालक ने शिकायती पत्र में उत्पीड़न का साफ़ ज़िक्र करते हुए कहा है कि 28 जून 2025 को संविदा चालक सलमान के साथ लखनऊ – बनारस मार्ग पर ड्यूटी के लिए भेजा गया था। ड्यूटी के दौरान चालक सलमान मुझे हैवानियत के नज़रिये से लगातार घूरता रहा। लखनऊ वापसी के दौरान सलमान ने मेरा हांथ पकड़ने की कोशिश की और मेरे साथ छेड़खानी का प्रयास किया।
महिला परिचालक ने शिकायती पत्र में लिखा है कि सलमान की गन्दी मानसिकता को देख कर मैं असहज और भयभीत हो गयी। शिकायती पत्र में डिपो में तैनात नियमित परिचालक अतुल कुमार सिंह द्वारा उत्पीड़न का जिक्र भी किया गया है। सबूतों के आधार पर चैट्स के स्क्रीनशॉट सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक को सौंप दिए हैं। पीड़ित महिला ने कई बातों खुलासा करते हुये कहा कि अतुल कुमार सिंह आये दिन एसी बस पर ड्यूटी देने के बहाने मेरे नंबर पर कॉल,अश्लील अनावश्यक मैसेज करके मुझे परेशान करने लगे।
चार महिलाओं ने एक साथ की शिकायत
जानकारी के मुताबिक नियमित परिचालक अतुल कुमार सिंह के खिलाफ चार महिला परिचालकों ने सामूहिक शिकायती पत्र भी दिया है। पीड़िताओं ने परेशान होकर क्षेत्रीय प्रबंधक आर के त्रिपाठी और परिवहन निगम मुख्यालय की चौखड़ का दरबाजा खटखटाया है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने तत्काल लिया एक्शन

अवध डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सत्यनारायण चौधरी ने बताया कि नियमित परिचालक अतुल कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। संविदा चालक सलमान बेग की ड्यूटी पर रोक लगा दी। आगे की कार्यवाही गतिशील है।
12 दिन बीतने के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही
पीड़िताओं ने बताया कि निगम को प्रार्थना पत्र सौंपे 12 दिन बीत चुके हैं। अभी तक न ही कोई ठोस विभागीय कार्यवाही हुई और न ही कहीं एफआईआर दर्ज हुई। मामले को दबाया जा रहा है। कार्यवाही वापस लेने का दबाव भी बनाया जा रहा है। गौरतलब रहे कि लखनऊ क्षेत्र में मृतक आश्रित कोटे से करीब 9 महिलाएं परिचालक की पद पर भर्ती हुई है। इनमें से 5 महिलायें अवध डिपो, 2 महिलायें कैसरबाग़ डिपो और 2 महिलाये चारबाग़ डिपो में तैना है।
महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में ![]()
अब सवाल ये है कि महिला सुरक्षा की बनात करने वाली योगी सरकार और बड़े-बड़े दाबे पेश करने वाले परिवहन मंत्री कहा हैं ? ऐसे में परिवहन निगम में पीड़िताओं के साथ क्या इन्साफ होगा ? ये तो आने वाला वक़्त ही तय करेगा। कि योगी सरकार के आलाधिकारी पूरे मामले पर कोई ठोस कार्यवाही करेंगे या कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति कर के मामले को रफा दफा कर देंगे। आखिर कब तक परिवहन निगम में ड्यूटी के नाम पर महिलाओं का शोषण होगा ?
क्या नई महिला परिचालकों की भर्ती के सुरक्षा इन्तज़ाम होंगे?
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने हाल ही में 1800 महिला परिचालकों की भर्ती के बाद 3200 पदों पर नई भर्ती की घोषणा भी गई है। ऐसे में देखना होगा कि परिवहन निगम में नई भर्ती महिला परिचालकों की सुरक्षा के इन्तज़ाम होंगे।
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