40 साल से कम उम्र में भी तेजी से बढ़ रहा Brain Stroke का खतरा

Sandesh Wahak Digital Desk: आजकल Brain Stroke सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। अब 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक जाने वाले खून का फ्लो अचानक रुक जाता है या किसी ब्लड वेसल के फटने से दिमाग को नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में दिमाग के सेल्स को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे प्रभावित होने लगते हैं।

दरअसल ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण आमतौर पर अचानक दिखाई देते हैं और अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। अचानक बोलने में दिक्कत होना, चेहरे या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना, तेज सिरदर्द, चक्कर आना और चलने या देखने में परेशानी जैसे संकेत ब्रेन स्ट्रोक की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कम उम्र में Brain Stroke के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण स्मोकिंग और ड्रग्स का सेवन माना जाता है। सिगरेट या तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्व ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ा देते हैं।

इसके अलावा कुछ लोग नशीले पदार्थों का सेवन भी करते हैं, जिससे दिमाग की ब्लड वेसल्स प्रभावित हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, ज्यादा तनाव, खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट भी स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने वाले कारक माने जाते हैं।

कम उम्र में स्ट्रोक (Brain Stroke) के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं। इनमें चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा पड़ जाना, हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होना, बोलने या समझने में परेशानी होना, अचानक चक्कर आना और तेज सिरदर्द होना शामिल है। ऐसे लक्षणों को पहचानना और तुरंत इलाज कराना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से स्थिति को संभाला जा सकता है।

ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार

दरअसल ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। पहला इस्केमिक स्ट्रोक होता है, जिसे सबसे सामान्य माना जाता है। यह तब होता है जब दिमाग की किसी ब्लड वेसल में खून का थक्का बन जाता है और खून का फ्लो रुक जाता है।

दूसरा प्रकार हेमोरेजिक स्ट्रोक होता है। इसमें दिमाग की ब्लड वेसल फट जाती है और खून बहने लगता है। यह स्थिति काफी गंभीर मानी जाती है और इसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

तीसरा प्रकार ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक होता है, जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहा जाता है। इसमें दिमाग तक खून का फ्लो कुछ समय के लिए रुक जाता है और बाद में सामान्य हो जाता है। हालांकि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक का संकेत भी हो सकता है।

किन लोगों में ज्यादा खतरा?

दरअसल कुछ लोगों में ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) का खतरा दूसरों की तुलना में अधिक होता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा ज्यादा तनाव लेना, लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि की कमी और अनहेल्दी खानपान भी इस खतरे को बढ़ाने वाले कारण माने जाते हैं।

जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को स्ट्रोक हो चुका है, उनमें भी इसका जोखिम अधिक हो सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के उपाय

असल में ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) से बचाव के लिए स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले स्मोकिंग और नशीले पदार्थों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। नियमित व्यायाम करना, संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना और वजन को नियंत्रित रखना भी फायदेमंद होता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। पर्याप्त नींद लेना और तनाव को कम करने की कोशिश करना भी जरूरी माना जाता है। अगर शरीर में स्ट्रोक से जुड़े किसी भी तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर सावधानी और सही जीवनशैली अपनाकर इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

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