यूपी विधानसभा में ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक पास, घरौनी को मिला कानूनी दर्जा
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। यूपी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक-2025 को मंजूरी मिल गई है। इस नए कानून के आने से गांवों में संपत्ति के मालिकाना हक और उसके ट्रांसफर से जुड़ी जटिलताएं खत्म हो जाएंगी।
अभी तक गांवों में मकानों के मालिकाना हक को लेकर अक्सर विवाद होते थे, लेकिन अब इस कानून से काफी कुछ बदल जाएगा।
घरौनी ही असली प्रमाण: अब घरौनी (ग्रामीण आबादी खेल) को ही आधिकारिक दस्तावेज माना जाएगा।
आसान होगी खरीद-बिक्री: गांवों में घर खरीदना, बेचना और नाम बदलवाना (नामांतरण) अब शहर की संपत्तियों की तरह आसान हो जाएगा।
वरासत की प्रक्रिया सरल: वरासत या सुधार के लिए अब ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, इसकी प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है।
विधेयक पास होने के दौरान सदन में एक असहज स्थिति भी पैदा हुई। जब इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा हो रही थी, तब संबंधित विभाग का कोई भी बड़ा अधिकारी वहां मौजूद नहीं था। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे सदन की अवमानना जैसा माना।
बांके बिहारी मंदिर न्यास समेत 10 विधेयक अब बने कानून
सदन को यह भी जानकारी दी गई कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास विधेयक समेत कुल 10 विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी है। अब ये आधिकारिक रूप से कानून बन गए हैं। इनमें जीएसटी संशोधन, निजी विश्वविद्यालय संशोधन और मोटर यान कराधान जैसे महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं।
पटल पर रखे गए अन्य महत्वपूर्ण अध्यादेश
सरकार ने सदन में कई अन्य संशोधनों के लिए अध्यादेश भी रखे, जिनमें शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश।
नगर निगम और सुगम्य व्यापार से जुड़े संशोधन।
पेंशन की हकदारी और दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान संशोधन।
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