इकरा हसन को इंसाफ दिलाने के लिए सड़क से संसद तक होगी लड़ाई: सपा सांसद हरेंद्र मलिक

Sandesh Wahak Digital Desk: सहारनपुर कलेक्ट्रेट में सांसद इकरा हसन के साथ कथित अभद्रता का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों में आक्रोश है और लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य फैसल सलमानी ने इसे बेहद गंभीर राजनीतिक मामला बताते हुए कहा कि इस संबंध में जल्द ही वे उच्च अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

सपा सांसद ने जताई आपत्ति

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरेंद्र मलिक ने सहारनपुर में इकरा हसन के साथ हुई घटना पर गहरी नाराज़गी जताते हुए इसे पूरी तरह निंदनीय बताया है। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले को किसी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और इकरा को इंसाफ दिलाने के लिए आंदोलन का बिगुल बज चुका है।

गुरुवार को मुजफ्फरनगर में मीडिया से बात करते हुए हरेंद्र मलिक ने ऐलान किया कि कांवड़ यात्रा के शांतिपूर्ण संपन्न होने के बाद राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में एक विशाल महापंचायत बुलाई जाएगी। इस महापंचायत में न सिर्फ इकरा हसन को न्याय दिलाने की रणनीति बनेगी, बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए भी ठोस कदमों पर मंथन होगा।

उन्होंने कहा यह सिर्फ इकरा की लड़ाई नहीं है, यह संविधान, समानता और अभिव्यक्ति के अधिकार की लड़ाई है। समाजवादी पार्टी इस लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक लड़ेगी। राजनीतिक सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। पारिवारिक राजनीति के सवाल पर उन्होंने कहा कि छोटे बेटे को फिलहाल राजनीति में लाने की कोई योजना नहीं है, जबकि बड़े बेटे पंकज मलिक चरथावल से चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि “मुजफ्फरनगर, शामली, सदर और चरथावल इन चारों विधानसभा सीटों पर हमें जनता का समर्थन मिलता रहा है। जहां से पार्टी कहेगी, वहीं से लड़ेंगे।” सांसद के इस रुख से साफ है कि सहारनपुर की घटना को लेकर समाजवादी पार्टी अब आक्रामक तेवर में आ चुकी है और आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक रूप से और तेज़ हो सकता है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, 1 जुलाई को कैराना की सांसद इकरा हसन नगर पंचायत अध्यक्ष शमा परवीन के साथ सहारनपुर के एडीएम कार्यालय पहुंचीं थीं। आरोप है कि वहां मौजूद एडीएम ने दोनों जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें कार्यालय से जाने के लिए कह दिया। सांसद इकरा हसन ने इस संबंध में शासन को शिकायत पत्र भी भेजा है।

सांसद का कहना है कि वह छुटमलपुर नगर पंचायत की समस्याओं को लेकर एडीएम से मिलने गई थीं। दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक एडीएम कार्यालय में मौजूद नहीं थे, और जब तीन बजे पहुंचे तो उन्होंने न सिर्फ बातचीत में असम्मानजनक रवैया अपनाया बल्कि महिला जनप्रतिनिधियों के साथ अनुचित व्यवहार किया। सांसद ने कहा कि “जब सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण की बात करती है, तो इस तरह की घटनाएं उन दावों की सच्चाई उजागर कर देती हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक सांसद होने के नाते उनसे जुड़ा प्रोटोकॉल तक नहीं निभाया गया।

 

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