1 अगस्त से UPI में होने जा रहे हैं ये बड़े बदलाव, बैलेंस चेक से लेकर ऑटोपे तक सब बदल जायेगा
Sandesh Wahak Digital Desk : भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा संचालित यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) में 1 अगस्त 2025 से कुछ नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इन बदलावों का उद्देश्य यूपीआई को अधिक विश्वसनीय, सुगम और बिना किसी रुकावट के काम करने वाला बनाना है। यह कदम हाल में हुई यूपीआई सेवाओं में व्यवधान की घटनाओं के बाद उठाया गया है।
क्या थी यूपीआई सेवा में व्यवधान की वजह?
पिछले कुछ महीनों में यूपीआई ने दो बड़े व्यवधानों का सामना किया। 26 मार्च और 12 अप्रैल को हुए इन व्यवधानों के कारण करोड़ों उपयोगकर्ता प्रभावित हुए और करोड़ों रुपये के लेनदेन अटक गए। इन घटनाओं के बाद यूपीआई को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं।

यूपीआई की वैश्विक पहचान
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई रीयल-टाइम भुगतान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनकर उभरा है। यूपीआई ने वीसा जैसी वैश्विक भुगतान प्रणालियों को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 85% डिजिटल भुगतान यूपीआई के माध्यम से होते हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 60% भुगतानों के लिए जिम्मेदार है।
1 अगस्त से लागू होने वाले प्रमुख बदलाव
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खाता शेष जांच पर सीमा: अब उपयोगकर्ता एक दिन में अधिकतम 50 बार ही अपने खाते का शेष जांच सकेंगे। पहले इसकी कोई सीमा नहीं थी।
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ऑटोपे ट्रांजैक्शन के लिए निश्चित समय: ऑटोपे लेनदेन, जैसे सब्सक्रिप्शन, ईएमआई और उपयोगिता बिलों का भुगतान अब दिन में किसी भी समय नहीं, बल्कि निर्धारित समय स्लॉट में ही किया जाएगा।
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उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव: ये बदलाव सीधे तौर पर उपयोगकर्ताओं को प्रभावित नहीं करेंगे, क्योंकि उनके ऑटोपे भुगतान पहले की तरह ही संसाधित होंगे। हालांकि, व्यवसायों को भुगतान संग्रह के अपने समय में बदलाव करना होगा।
बदलावों का उद्देश्य
इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य यूपीआई प्लेटफॉर्म की गति को बढ़ाना और भीड़भाड़ को कम करना है। इससे भुगतान प्रणाली अधिक सुचारू और विश्वसनीय बनेगी।

