जिंदगी भर साथ नहीं निभाएंगे ट्रांसप्लांट हुए ये अंग, यह होती है एक्सपायरी डेट
Sandesh Wahak Digital Desk: लोग अक्सर मान लेते हैं कि घुटने या हिप रिप्लेसमेंट जिंदगी भर साथ निभाएंगे, लेकिन चिकित्सा जगत इससे इत्तेफाक नहीं रखता। डॉक्टर साफ कह रहे हैं कि हर इम्प्लांट की एक एक्सपायरी डेट होती है। जो कि ज्यादातर 20 से 25 साल के बीचबताई जाती है। अब भारत उन मरीजों की पहली बड़ी लहर में प्रवेश कर रहा है, जिनके पुराने हो रहे इम्प्लांट ढीले पड़ रहे हैं, घिस रहे हैं या खराब हो रहे हैं। नतीजतन हजारों लोगों को जल्द ही दूसरी, और कहीं ज्यादा मुश्किल रिवीजन सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस में हुआ खुलासा
दिल्ली में आयोजित तीन-दिवसीय रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस (RAC) 2025 में शामिल 850 से ज्यादा सर्जनों ने इस चुनौती पर गंभीर चर्चा की। यह बैठक पूरी तरह रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट पर केंद्रित एक वैज्ञानिक मीटिंग थी, जहां विशेषज्ञों ने इसे एक “साइलेंट लेकिन गंभीर” हेल्थ चैलेंज बताया। उनकी चेतावनी साफ थी, भारत के पास अभी इतनी बड़ी संख्या में रिवीजन सर्जरी को संभालने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित सर्जन नहीं हैं।
इस दौरान मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में रोबोटिक नी और हिप रिप्लेसमेंट के चेयरमैन एवं हेड डॉ. अनिल अरोड़ा ने कहा कि हर हिप या नी रिप्लेसमेंट अंततः खराब हो जाता है। 2000 के दशक में देश में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी का बड़ा उछाल आया था, और अब वही हजारों इम्प्लांट अपनी लाइफ साइकिल के अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। उनके मुताबिक, भारत को तुरंत ज्यादा कुशल रिवीजन सर्जनों की जरूरत है।
पूरी हो जाती है स्वाभाविक उम्र
एक्सपर्ट्स ने यह भी स्पष्ट किया कि इम्प्लांट ‘फेल’ नहीं हो रहे, बल्कि उनकी स्वाभाविक उम्र पूरी हो रही है। AIIMS दिल्ली के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर विजय कुमार ने बताया कि ज्यादातर इम्प्लांट की लाइफ 15-20 साल होती है। समय बीतने के साथ ढीलापन, घिसाव या बेचैनी जैसे लक्षण सामने आने लगते हैं और मरीजों को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ती है।
रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें सर्जन को पुराना इम्प्लांट हटाकर हड्डियों के नुकसान या इन्फेक्शन को संभालना होता है और फिर विशेष कंपोनेंट्स की मदद से जॉइंट को दोबारा बनाना पड़ता है। यह पूरी तरह विशेषज्ञता, सूक्ष्म प्लानिंग और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर निर्भर प्रक्रिया है। इम्प्लांट के खराब होने के संकेत अक्सर बार-बार होने वाला दर्द, चलने में कठिनाई या जॉइंट का ढीला लगता महसूस होना है। चिंता की बात यह भी है कि कई मरीज नहीं जानते कि घुटने और कूल्हे के इम्प्लांट को 10-12 साल बाद नियमित चेक-अप की जरूरत होती है। जब वे लंबे समय बाद डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक नुकसान इतना बढ़ चुका होता है कि सर्जरी और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
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