‘जूतों की माला पहनाकर घुमाया जाए’, पूर्व विधायक ने कथावाचकों पर की अभद्र टिप्पणी

Sandesh Wahak Digital Desk: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग ने मर्यादाओं की सीमा लांघ दी है। चंदला से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति (RD Prajapati ) ने देश के प्रतिष्ठित कथावाचकों और संतों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और ओछी बयानबाजी की है। एक सार्वजनिक मंच से दिए गए इस भाषण का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने उनके इस आचरण की कड़ी निंदा की है।

कथावाचकों को ठहराया ‘दोषी’, संतों पर उगला जहर

रविवार को भोपाल में आयोजित अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के संयुक्त मोर्चा सम्मेलन के दौरान आरडी प्रजापति (RD Prajapati ) ने अपना आपा खो दिया। उन्होंने अनिरुद्धाचार्य और जगद्गुरु रामभद्राचार्य सहित पांच प्रमुख कथावाचकों का नाम लेते हुए उन पर महिलाओं के अपमान का आरोप लगाया।

प्रजापति ने बेहद छिछले शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ये बाबा करोड़ों की भीड़ में बहन-बेटियों को गाली देते हैं। उन्होंने संतों द्वारा व्यास पीठ से कही गई बातों को गलत तरीके से पेश किया और यहाँ तक कह दिया कि, “इन बाबाओं को जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाना चाहिए।”

IAS संतोष वर्मा के समर्थन में दिया विवादित बयान

दरअसल, यह पूरा मामला आईएएस (IAS) संतोष वर्मा के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम का था। प्रजापति ने तर्क दिया कि अगर अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, तो इन कथावाचकों पर क्यों नहीं? हालांकि, अपनी बात रखने के चक्कर में उन्होंने संतों के लिए जिन शब्दों का चयन किया, उसने समाज के एक बड़े वर्ग को आहत कर दिया है।

भाजपा और कांग्रेस ने की एकसुर में निंदा

आरडी प्रजापति के इस बयान ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उबाल ला दिया है। भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने इसे ‘सनातन धर्म का अपमान’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा नेता (पूर्व भाजपा विधायक) ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है, वह घोर निंदनीय है और यह विपक्षी दलों के एजेंडे का हिस्सा है।

कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी इस बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अपना नाम चमकाने के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना राजनीति का एक दुर्भाग्यपूर्ण ट्रेंड बन गया है। महिलाओं और गुरुओं का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

कौन हैं आरडी प्रजापति?

आरडी प्रजापति साल 2013 में भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। हालांकि, 2018 में टिकट कटने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी और समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने हाथ आजमाया, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। फिलहाल वह अपनी तीखी बयानबाजी के कारण विवादों के केंद्र में हैं।

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